रिपोर्ट- प्रमोद श्रीवास्तव
INDIA Alliance Rally : दिल्ली का रामलीला मैदान, विपक्षी एकजुटता का बड़ा मंच… और निशाने पर चुनाव आयोग। वोट बचाओ, देश बचाओ के नारे के साथ INDIA गठबंधन ने अपनी ताकत दिखाई। राहुल गांधी से लेकर मल्लिकार्जुन खड़गे और अखिलेश यादव तक, विपक्ष के तमाम बड़े चेहरे एक मंच पर नजर आए। मुद्दा था SIR, मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा। विपक्ष ने लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा का सवाल उठाया, तो बीजेपी ने पलटवार करते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज किया।
INDIA Alliance Rally : विपक्ष की हुंकार, भाजपा ने बताया बेकार
अब विपक्षी गठबंधन की रैली को कई राजनीतिक नजरियों से देखा जा सकता है। एक तरफ विपक्ष इसे लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा की लड़ाई के रूप में पेश कर रहा है, तो दूसरी तरफ बीजेपी इसे राजनीतिक अस्तित्व और अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने की कवायद के रूप में देख रही है। इस रैली के बाद सवाल है कि क्या विपक्ष का यह आंदोलन दिल्ली से निकलकर देशव्यापी अभियान बनेगा ? क्या INDIA गठबंधन अपनी एकजुटता कायम रख पाएगा ? और क्या इस सियासी संघर्ष का कोई संस्थागत या कानूनी नतीजा भी निकलेगा ? क्योंकि सवाल सिर्फ रैली में जुटी भीड़ का नहीं, बल्कि विपक्ष की एकजुटता, चुनाव आयोग पर उठाए गए सवालों और आने वाले दिनों की राजनीतिक रणनीति का है।
INDIA Alliance Rally : मैदान में विपक्षी गठबंधन, ‘ज्ञानेश’ पर टशन
अलग-अलग पार्टियां, मकसद एक- ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग। विपक्ष के तमाम बड़े नेताओं ने दो दिन से दिल्ली में डेरा डाल रखा है। शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे के घर विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग पास किया, तो रविवार को सोनिया समेत राहुल, प्रियंका, अखिलेश, ममता और तेजस्वी बाकी नेताओं के साथ रामलीला मैदान पहुंचे। रैली में फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, हेमंत सोरेन, रेवंत रेड्डी और सुप्रिया सुले समेत INDIA ब्लॉक के 21 दलों के कई नेता मौजूद रहे। करीब चार घंटे चले कार्यक्रम में राहुल गांधी ने कहा कि मेरी बात सच होगी, ज्ञानेश कुमार CEC के पद से हटेंगे और जेल जाएंगे।राहुल गांधी ने कहा कि ये प्रोटेस्ट किसी एक पार्टी, एक नेता का नहीं है।
INDIA Alliance Rally : जनता के बीच विपक्ष के मुद्दे की स्वीकार्यता ?
ये देश का प्रोटेस्ट है।देश की आवाज है, संविधान को बचाने की आवाज है।राहुल ने कहा कि मोदी-ज्ञानेश ने देश की आत्मा, संविधान, लोकतंत्र पर हमला किया है। हम ये स्वीकार नहीं करेंगे। ज्ञानेश कुमार CEC पद से हटेगा, ज्ञानेश कुमार जेल जाएगा। ये आम चोरी नहीं है, रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस हैं। इसको देशद्रोह कहते हें। ज्ञानेश कुमार के बिना मोदी न पीएम बनते, न शाह गृह मंत्री बनते।
तो वहीं इंडिया गठबंधन की रैली को फ्लॉप बताते हुए भाजपा ने अराजकता का तमाशा बताया। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने विपक्ष की रैली को लोकतांत्रिक सरकार को अस्थिर करने की साजिश का हिस्सा बताया। कहा कि 1 नवंबर का दिन भारत के इतिहास में एक काला दिन माना जाता है। राहुल ने आज के दिन रैली आयोजित करके सिख समुदाय के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है।
उधर इंडिया गठबंधन की रामलीला मैदान में रैली के विरोध में भाजपा ने दिल्ली समेत देशभर में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ मार्च निकाला। दिल्ली में इस मार्च का नेतृत्व केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने किया जिसमें दिल्ली की मुख्यमंत्री सहित बीजेपी के कई नेता शामिल हुए। इस दौरान नेताओं ने 1984 के सिख विरोधी दंगों में मारे गए सिखों की याद में सिर पर काली पट्टियां बांधीं।
INDIA Alliance Rally : विपक्ष की रैली को लेकर किसने क्या कहा ?
• राहुल बोले- ज्ञानेश कुमार सीईसी पद से हटेगा
• राहुल गांधी ने कहा- आप संविधान से बड़े नहीं हो
• राहुल ने कहा- देश में जो बेचा है, उसका बदला लेंगे
• राहुल गांधी ने कहा- हमें नफरत नहीं, मोहब्बत फैलानी है
• राहुल ने कहा- ज्ञानेश कुमार के बिना मोदी नहीं पीएम बनते
• ममता बोलीं- आपने नौकरी लूटीं, मां-बहनों का सम्मान लूटा
• ममता बनर्जी बोलीं- ईवीएम लूटा, लोकतंत्र लूटा, संविधान लूटा
• सपा अध्यक्ष बोले- जो पापी है उसका नाश होता है
• अखिलेश बोले- 2022 में यूपी में वोट चोरी की सरकार बनी
• खड़गे बोले- मोदी अपना वोट खुद चुन रहे
• कांग्रेस अध्यक्ष बोले- आप ED, CBI लगा लो, हम डरेंगे नहीं
• तेजस्वी यादव बोले- ज्ञानेश कुमार को जेल भेजो
• खरगे की हुंकार: मोदी को हटाएंगे, तभी बचेगा लोकतंत्र
• जेपी नड्डा- लोकतांत्रिक सरकार को अस्थिर करने की साजिश का हिस्सा
• ये रैली सिख समुदाय के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया- नड्डा
• संबित पात्रा बोले- इंडिया ब्लॉक की महारैली फ्लॉप रही
• संबित पात्रा- भारत आपके अब्बू जान का नहीं, देश के लोगों का है
दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को विपक्षी गठबंधन की रैली को कई राजनीतिक नजरियों से देखा जा सकता है। एक तरफ विपक्ष इसे लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा की लड़ाई के रूप में पेश कर रहा है, तो दूसरी ओर बीजेपी इसे राजनीतिक अस्तित्व और अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने की कवायद के रूप में देख रही है। ऐसे में अब दिल्ली की रैली को केवल भीड़ या नेताओं के भाषणों के आधार पर नहीं, बल्कि उसके बाद होने वाली राजनीतिक, कानूनी और संगठनात्मक कार्रवाई के आधार पर परखना होगा। विपक्ष के लिए चुनौती आंदोलन को लगातार आगे बढ़ाने की है, जबकि चुनाव आयोग के सामने मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर उठे सवालों का पारदर्शी जवाब देने की अपेक्षा है।
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