MP Foundation Day 2026 : भोपाल, मध्य प्रदेश आज अपनी स्थापना के 71 वर्ष पूरे कर रहा है। 1 नवंबर 1956 को देश के नक्शे पर एक नए राज्य के रूप में उभरे मध्य प्रदेश का जन्म किसी सामान्य प्रशासनिक फैसले का नतीजा नहीं था। इसके पीछे रियासतों के विलय, राजनीतिक सहमति, भाषाई पहचान और राजधानी के चयन को लेकर लंबी कवायद चली थी।
आज जिसे हम देश का दिल कहते हैं, उसका मौजूदा स्वरूप चार अलग-अलग प्रशासनिक क्षेत्रों और रियासती व्यवस्थाओं को मिलाकर तैयार किया गया था। इस प्रक्रिया में कई बड़े शहरों ने राजधानी बनने की दावेदारी पेश की, राजनीतिक मतभेद सामने आए और प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू तक को नए राज्य के भौगोलिक आकार पर आश्चर्य हुआ था।
मध्य प्रदेश ने इन 71 वर्षों में कई ऐतिहासिक घटनाएं देखीं। भोपाल गैस त्रासदी जैसी भीषण आपदा से लेकर कृषि, उद्योग, शिक्षा और स्वच्छता के क्षेत्र में आगे बढ़ने तक राज्य का सफर चुनौतियों और उपलब्धियों से भरा रहा है।

MP Foundation Day 2026 : चार अलग-अलग हिस्सों से तैयार हुई मध्य प्रदेश की पहचान
आजादी के बाद भारत में प्रशासनिक व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए राज्यों को अलग-अलग श्रेणियों में रखा गया था। 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के समय वर्तमान मध्य प्रदेश का क्षेत्र चार प्रमुख प्रशासनिक इकाइयों में बंटा हुआ था।
इनमें पहला था सेंट्रल प्रोविंसेज एंड बरार, जिसे पार्ट-ए राज्य का दर्जा मिला था। इसकी राजधानी नागपुर थी। इसमें महाकौशल और छत्तीसगढ़ के बड़े हिस्से शामिल थे।
दूसरा क्षेत्र था मध्य भारत, जिसका गठन ग्वालियर और इंदौर समेत कई रियासतों को मिलाकर किया गया था। इसकी शीतकालीन राजधानी ग्वालियर और ग्रीष्मकालीन राजधानी इंदौर थी।
तीसरा हिस्सा विंध्य प्रदेश था। इसमें बुंदेलखंड और बघेलखंड की कई रियासतें शामिल थीं। इसकी राजधानी रीवा थी।
चौथा क्षेत्र था भोपाल रियासत, जहां नवाब हमीदुल्लाह खान का शासन था। यह क्षेत्र अपनी अलग राजनीतिक और प्रशासनिक पहचान रखता था।
इन चारों क्षेत्रों की अपनी अलग व्यवस्था, राजनीतिक परिस्थितियां और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि थी। इन्हें एक राज्य में शामिल करना आसान नहीं था।
MP Foundation Day 2026 : राज्य पुनर्गठन आयोग ने तैयार की नए मध्य प्रदेश की रूपरेखा
भाषा और प्रशासनिक सुविधाओं के आधार पर राज्यों की सीमाएं तय करने के लिए अक्टूबर 1953 में केंद्र सरकार ने राज्य पुनर्गठन आयोग बनाया। न्यायमूर्ति फजल अली इसके अध्यक्ष थे। आयोग में केएम पणिक्कर और हृदयनाथ कुंजरू भी सदस्य थे।आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती अलग-अलग रियासतों और प्रशासनिक क्षेत्रों को एक मजबूत राज्य के रूप में संगठित करने की थी।
आयोग की सिफारिशों के अनुसार, पुराने मध्य प्रांत का मराठी भाषी विदर्भ क्षेत्र, जिसमें नागपुर भी शामिल था, बॉम्बे राज्य में शामिल किया जाना था। वहीं महाकौशल, छत्तीसगढ़, मध्य भारत, विंध्य प्रदेश और भोपाल को मिलाकर नए मध्य प्रदेश के गठन की योजना बनाई गई। हालांकि, इस प्रस्ताव का सभी नेताओं ने तत्काल समर्थन नहीं किया। मध्य भारत और विंध्य प्रदेश के कई नेताओं को आशंका थी कि नए राज्य में शामिल होने से उनकी पुरानी राजनीतिक और क्षेत्रीय पहचान खत्म हो जाएगी।
MP Foundation Day 2026 : नेहरू को भी चौंका गया था मध्य प्रदेश का प्रस्तावित नक्शा
नए राज्य का भौगोलिक स्वरूप काफी विस्तृत था। जब प्रस्तावित मध्य प्रदेश का नक्शा तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के सामने रखा गया, तो उन्होंने इसके आकार को लेकर आश्चर्य जताया था। मध्य भारत के पूर्व मुख्यमंत्री लीलाधर जोशी के संस्मरणों में इस प्रसंग का उल्लेख मिलता है। बताया जाता है कि नक्शा देखने के बाद नेहरू ने इसकी बनावट और लंबाई-चौड़ाई पर सवाल उठाए थे।
नए मध्य प्रदेश के समर्थक नेताओं ने इस आशंका का जवाब देने के लिए आर्थिक और भौगोलिक आधार पर राज्य की उपयोगिता समझाने की कोशिश की। इसके लिए प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और नियोजन विशेषज्ञ प्रोफेसर वीकेआरवी राव की मदद ली गई। उन्होंने मध्य प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों, आर्थिक संभावनाओं और विकास की क्षमता का विश्लेषण करते हुए ‘इकोनॉमिक वायबिलिटी ऑफ मध्यप्रदेश’ शीर्षक से लेख लिखा। इस लेख और नेताओं की ओर से दिल्ली में किए गए प्रयासों ने नए राज्य के पक्ष में माहौल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
MP Foundation Day 2026 : भोपाल कैसे बना मध्य प्रदेश की राजधानी?
नए राज्य के गठन की चर्चा के साथ ही राजधानी का सवाल सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया था। ग्वालियर, इंदौर और जबलपुर जैसे शहर इस दौड़ में शामिल थे। ग्वालियर और इंदौर पहले से ही मजबूत प्रशासनिक और राजनीतिक केंद्र थे। वहीं राज्य पुनर्गठन आयोग ने अपनी रिपोर्ट में जबलपुर को राजधानी बनाने की सिफारिश की थी। लेकिन अंतिम निर्णय में भोपाल बाजी मार ले गया।
भोपाल के पक्ष में सबसे बड़ा तर्क यहां उपलब्ध प्रशासनिक बुनियादी ढांचा था। शहर में मिंटो हॉल जैसी बड़ी सरकारी इमारतें मौजूद थीं, जहां सरकार और प्रशासन के कामकाज की व्यवस्था आसानी से की जा सकती थी। इसके अलावा, भोपाल का भौगोलिक स्थान और प्रशासनिक सुविधाएं भी राजधानी के चयन में महत्वपूर्ण मानी गईं। गौरतलब है कि भोपाल रियासत का भारत में विलय भी आसान नहीं था। नवाब हमीदुल्लाह खान शुरुआत में भारत संघ में शामिल होने के इच्छुक नहीं थे। जनता के आंदोलन और राजनीतिक प्रयासों के बाद जून 1949 में भोपाल का भारत संघ में विलय हुआ।
राजधानी का दर्जा भोपाल को मिला, जबकि जबलपुर को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की स्थापना के माध्यम से एक महत्वपूर्ण संस्थागत पहचान मिली।
1 नवंबर 1956 को आधिकारिक रूप से अस्तित्व में आया मध्य प्रदेश
राज्य पुनर्गठन की प्रक्रिया के तहत 30 अप्रैल 1956 को संसद में विधेयक पेश किया गया। इसके बाद 11 सितंबर 1956 को राज्य पुनर्गठन अधिनियम पारित हुआ। आखिरकार 1 नवंबर 1956 को नया मध्य प्रदेश आधिकारिक रूप से अस्तित्व में आ गया। 31 अक्टूबर की मध्यरात्रि को भोपाल के ऐतिहासिक मिंटो हॉल में नए राज्य की सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया। इसी के साथ पंडित रविशंकर शुक्ल मध्य प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बने।
इस समारोह में पहले डॉ. पट्टाभि सीतारमैया ने राज्यपाल पद की शपथ ली। इसके बाद राज्यपाल ने पंडित रविशंकर शुक्ल को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। उस समय मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद हिदायतुल्ला भी इस ऐतिहासिक आयोजन का हिस्सा थे।
MP Foundation Day 2026 : अमावस्या की रात में गूंजे हजारों दीपों के उजाले के शब्द
मध्य प्रदेश के गठन से जुड़ा एक प्रसंग आज भी खास तौर पर याद किया जाता है। वरिष्ठ पत्रकार और लेखक विजय दत्त श्रीधर जी के संस्मरणों के अनुसार, जिस रात नए मध्य प्रदेश का जन्म हुआ, वह अमावस्या की रात थी। संयोग से उसी दिन दीपावली भी मनाई जा रही थी। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान जब किसी ने पंडित रविशंकर शुक्ल को याद दिलाया कि आज अमावस्या है, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया था। “पर इस अंधेरे को मिटाने के लिए हजारों दीये तो जल रहे हैं।” यह कथन नए राज्य के गठन के उत्साह और भविष्य की उम्मीदों का प्रतीक बन गया।
बताया जाता है कि पंडित रविशंकर शुक्ल उसी शाम नागपुर से जीटी एक्सप्रेस के प्रथम श्रेणी के डिब्बे में भोपाल पहुंचे थे। रास्ते में विभिन्न रेलवे स्टेशनों पर उनका स्वागत किया गया।
MP Foundation Day 2026 : पहली विधानसभा में थे 328 सदस्य
मध्य प्रदेश के गठन के बाद 17 दिसंबर 1956 को भोपाल के मिंटो हॉल में नवगठित विधानसभा का पहला सत्र शुरू हुआ। पहली विधानसभा में अलग-अलग क्षेत्रों से कुल 328 सदस्य शामिल हुए थे।
क्षेत्र विधानसभा सदस्य
मध्य प्रांत 150
मध्य भारत 88
विंध्य प्रदेश 60
भोपाल 30
कुल 328
इस विधानसभा में 12 महिला विधायक भी शामिल थीं। इस तरह अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक पृष्ठभूमि वाले क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने मिलकर नए मध्य प्रदेश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को आगे बढ़ाया।
MP Foundation Day 2026 : 44 साल बाद मध्य प्रदेश से अलग हुआ छत्तीसगढ़
मध्य प्रदेश के गठन के बाद अगले कई दशकों तक इसका भौगोलिक स्वरूप लगभग वैसा ही बना रहा। लेकिन वर्ष 2000 में एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ। लंबे समय से अलग छत्तीसगढ़ राज्य बनाने की मांग उठ रही थी। क्षेत्रीय पहचान, प्रशासनिक सुविधा और विकास की जरूरतों को देखते हुए केंद्र सरकार ने अलग राज्य के गठन का फैसला किया।
1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश से अलग होकर देश का नया राज्य बन गया।
इस विभाजन के साथ मध्य प्रदेश ने अपने कुल क्षेत्रफल का लगभग 30.4 प्रतिशत और जनसंख्या का करीब 26.62 प्रतिशत हिस्सा खो दिया। इसके बाद राज्य का वर्तमान भौगोलिक स्वरूप सामने आया।
MP Foundation Day 2026 : 71 वर्षों में कितना बदल गया मध्य प्रदेश?
1956 में जिस मध्य प्रदेश की शुरुआत हुई थी, आज उसका स्वरूप काफी बदल चुका है। राज्य ने इन सात दशकों में राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक मोर्चों पर कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। कभी पिछड़े राज्यों की श्रेणी में गिने जाने वाले मध्य प्रदेश ने कृषि के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। सोयाबीन, गेहूं और दलहन उत्पादन में राज्य की महत्वपूर्ण भूमिका है। शरबती गेहूं ने मध्य प्रदेश को देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी पहचान दिलाई है।
कृषि क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन के लिए राज्य को कई बार कृषि कर्मण पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। वहीं औद्योगिक विकास के लिहाज से इंदौर, भोपाल, पीथमपुर और जबलपुर जैसे शहर महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, सिंचाई और शहरी विकास के क्षेत्र में भी लगातार विस्तार हुआ है।
स्वच्छता के मामले में इंदौर ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। लगातार स्वच्छता पुरस्कार हासिल करने वाले इस शहर ने मध्य प्रदेश की छवि को नई पहचान दी है। हालांकि, रोजगार, औद्योगिक निवेश, ग्रामीण विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी चुनौतियां अब भी राज्य के सामने हैं।
MP Foundation Day 2026 : चार अंचलों के मेल से बनी एक पहचान
मध्य प्रदेश की स्थापना की कहानी केवल प्रशासनिक सीमाओं के पुनर्गठन की कहानी नहीं है। यह अलग-अलग भाषाओं, संस्कृतियों, रियासतों और परंपराओं को एक पहचान में जोड़ने की यात्रा भी है। महाकौशल, बुंदेलखंड, बघेलखंड, मालवा, निमाड़ और भोपाल जैसे क्षेत्रों की विविधता ने इस राज्य की सांस्कृतिक पहचान को समृद्ध बनाया है।
आज 1 नवंबर 2026 को मध्य प्रदेश अपना 71वां स्थापना दिवस मना रहा है। सात दशकों से अधिक की इस यात्रा में राज्य ने अनेक ऐतिहासिक पड़ाव पार किए हैं। अब चुनौती इन उपलब्धियों को आगे बढ़ाते हुए विकास को प्रदेश के हर क्षेत्र और हर नागरिक तक पहुंचाने की है।
नोट-ये लेख पुराने अखबरों प्रकाशित लेखों और रिसर्च पर आधारित है।


