AIPOC: 86वें सम्मेलन में विधायी सुधारों पर मंथन, यूपी विधानसभा मॉडल की सराहना

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By: Vandana Rawat

AIPOC: लखनऊ में आयोजित 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विधायी संस्थाओं की कार्यप्रणाली में गुणवत्ता के मानक स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए निरंतर सुधार जरूरी है।

AIPOC: सम्मेलन का तीसरा और अंतिम दिन बुधवार को

21 जनवरी को सम्मेलन का तीसरा एवं अंतिम दिन होगा। इस दिन लोकसभा अध्यक्ष समापन संबोधन देंगे। समापन सत्र में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल होंगे और सम्मेलन को संबोधित करेंगे।

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दूसरे दिन तीन प्रमुख मुद्दों पर मंथन

सम्मेलन के दूसरे दिन तीन अहम विषयों पर व्यापक चर्चा की गई।
पहला, पारदर्शी, कुशल और नागरिक-केंद्रित विधायी प्रक्रियाओं के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग।
दूसरा, विधायकों की क्षमता-वृद्धि के जरिए कार्यकुशलता में सुधार और लोकतांत्रिक शासन को मजबूत करना।
तीसरा, जनता के प्रति विधायिकाओं की जवाबदेही सुनिश्चित करना।

इन पूर्ण सत्रीय चर्चाओं में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला उपस्थित रहे, जबकि चर्चा का संचालन राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने किया।

यूपी विधानसभा की कार्यप्रणाली की सराहना

सम्मेलन को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने देशभर की विधायिकाओं में अपनाई जा रही सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को उत्तर प्रदेश विधानसभा की कार्यप्रणाली में समाहित करने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के प्रयासों को उल्लेखनीय बताया।

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विधायकों की क्षमताओं के रचनात्मक उपयोग पर जोर

ओम बिरला ने विधायकों की शैक्षणिक योग्यताओं और पेशेवर अनुभवों की पहचान कर उनके रचनात्मक उपयोग की पहल की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इससे विधायी कार्यों की गुणवत्ता और प्रभावशीलता दोनों बढ़ती हैं।

स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और मानकीकरण की जरूरत

पूर्व सम्मेलनों का उल्लेख करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने उत्कृष्टता, नवाचार और प्रौद्योगिकी के उपयोग जैसे मानकों पर राज्य विधायिकाओं के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की आवश्यकता बताई। उन्होंने 2019 में देहरादून में आयोजित सम्मेलन का हवाला देते हुए कहा कि विधायी कार्यप्रणाली में सुधार के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण जरूरी है।

मानकीकरण पर काम कर रही समिति

ओम बिरला ने बताया कि इस दिशा में एक समिति का गठन किया गया है, जो भारत में विधायी निकायों की प्रक्रियाओं और प्रथाओं के मानकीकरण से जुड़े विषयों पर विचार कर रही है।

संसद और राज्य विधायिकाओं में समन्वय पर बल

राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने विधायी संस्थाओं की कार्यकुशलता बढ़ाने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की भूमिका को अहम बताया। उन्होंने एआई को विश्वसनीय और प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक कदमों पर भी प्रकाश डाला।

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AIPOC: एआई के उपयोग और साझा ज्ञान की जरूरत

हरिवंश ने संसद में एआई के व्यावहारिक उपयोग और इसके क्रियान्वयन के तरीकों को रेखांकित करते हुए संसद और राज्य विधायिकाओं के बीच अधिक समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे संस्थागत ज्ञान का प्रभावी उपयोग संभव हो सकेगा।

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