Lactose Intolerance: 1 गिलास दूध और एक छोटा-सा एंजाइम, क्यों कुछ लोगों को नहीं पचता दूध?

- Advertisement -
Swadesh NewsAd image
https://swadeshlive.com/lactose-intolerance-milk-digestion-science/

Lactose Intolerance: दूध को हमेशा से संपूर्ण आहार माना गया है। बचपन से लेकर बुजुर्गों तक, इसे पोषण और ताकत का प्रमुख स्रोत समझा जाता है। लेकिन हर व्यक्ति के लिए दूध उतना सहज नहीं होता। कुछ लोगों के लिए एक गिलास दूध पेट में गैस, मरोड़, भारीपन और दस्त जैसी समस्याएं पैदा कर देता है।

अक्सर इसे लोग दूध से एलर्जी समझ लेते हैं, जबकि वास्तविकता इससे कहीं अधिक वैज्ञानिक और रोचक है। यह स्थिति ‘लैक्टोज़ असहिष्णुता’ कहलाती है, जो शरीर में एक विशेष एंजाइम की कमी के कारण होती है।

Lactose Intolerance: क्या है लैक्टोज़ और कैसे पचता है?

दूध में मौजूद मुख्य शर्करा को लैक्टोज़ कहा जाता है। यह एक डाईसेकराइड शर्करा है, जो ग्लूकोज़ और गैलेक्टोज़ नामक दो सरल शर्करा अणुओं से मिलकर बनी होती है।

जब हम दूध पीते हैं, तो छोटी आंत की सतह पर मौजूद ‘लैक्टेज़’ नामक एंजाइम लैक्टोज़ को तोड़कर ग्लूकोज़ और गैलेक्टोज़ में बदल देता है। इसके बाद ये दोनों तत्व शरीर में आसानी से अवशोषित होकर ऊर्जा प्रदान करते हैं।

लेकिन यदि शरीर में लैक्टेज़ पर्याप्त मात्रा में न बने, तो लैक्टोज़ पूरी तरह नहीं टूट पाता और यही स्थिति लैक्टोज़ असहिष्णुता कहलाती है।

Lactose Intolerance: लैक्टेज़ की कमी से क्यों होती है परेशानी?

जब अपचित लैक्टोज़ बड़ी आंत में पहुंचता है, तो वहां मौजूद बैक्टीरिया उसे किण्वित करने लगते हैं। इस प्रक्रिया में हाइड्रोजन, कार्बन डाईऑक्साइड और कभी-कभी मीथेन जैसी गैसें बनती हैं। इसी वजह से व्यक्ति को पेट फूलना, गैस, मरोड़ और दस्त जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। शोध बताते हैं कि समस्या दूध में नहीं, बल्कि उसे पचाने की शरीर की क्षमता में कमी के कारण होती है।

Lactose Intolerance: लैक्टोज़ असहिष्णुता के सामान्य लक्षण

लैक्टेज़ की कमी के लक्षण आमतौर पर दूध या डेयरी उत्पाद लेने के 30 मिनट से 2 घंटे के भीतर दिखाई देने लगते हैं।

मुख्य लक्षणों में शामिल हैं:

  • पेट फूलना और भारीपन
  • गैस बनना
  • पेट में मरोड़ या ऐंठन
  • दस्त
  • मितली और बेचैनी

हालांकि लक्षणों की तीव्रता व्यक्ति और दूध की मात्रा के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

Lactose Intolerance: दूध से एलर्जी और लैक्टोज़ असहिष्णुता में फर्क

कई लोग लैक्टोज़ असहिष्णुता को दूध से एलर्जी समझ लेते हैं, जबकि दोनों स्थितियां पूरी तरह अलग हैं। दूध से एलर्जी प्रतिरक्षा तंत्र की प्रतिक्रिया होती है, जिसमें त्वचा पर चकत्ते, सूजन या सांस लेने में परेशानी जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। वहीं लैक्टोज़ असहिष्णुता मुख्य रूप से पाचन तंत्र से जुड़ी समस्या है, जो लैक्टेज़ एंजाइम की कमी के कारण होती है।

Lactose Intolerance: क्यों कुछ लोग आसानी से पचा लेते हैं दूध?

वैज्ञानिकों के अनुसार जन्म के समय लगभग सभी स्तनधारी जीवों में लैक्टेज़ एंजाइम भरपूर मात्रा में बनता है, क्योंकि शिशु पूरी तरह मां के दूध पर निर्भर रहता है।

लेकिन उम्र बढ़ने के साथ शरीर लैक्टेज़ बनाने वाले जीन (LCT) की सक्रियता कम कर देता है। यही कारण है कि वयस्क अवस्था में कई लोगों को दूध पचाने में दिक्कत होने लगती है।

हालांकि करीब 10 हजार वर्ष पहले कुछ मानव समूहों में एक जेनेटिक बदलाव हुआ, जिसके कारण वयस्क होने पर भी उनके शरीर में लैक्टेज़ बनता रहा। इसे ‘लैक्टेज़ पर्सिस्टेंस’ कहा जाता है।

Lactose Intolerance: दुनिया की बड़ी आबादी प्रभावित

वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार दुनिया की लगभग 60 से 70 प्रतिशत वयस्क आबादी किसी न किसी स्तर पर लैक्टोज़ असहिष्णुता से प्रभावित है।

क्षेत्रीय आंकड़ों के अनुसार उत्तर यूरोप में यह समस्या अपेक्षाकृत कम है, जबकि एशिया और अफ्रीका के कई हिस्सों में इसकी दर काफी अधिक पाई जाती है।

Lactose Intolerance: क्या दूध पूरी तरह छोड़ना जरूरी है?

विशेषज्ञों का मानना है कि लैक्टोज़ असहिष्णुता का अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति को पूरी तरह दूध या डेयरी उत्पाद छोड़ने होंगे।

कई लोग सीमित मात्रा में दूध सहन कर लेते हैं। वहीं दही, पनीर और घी जैसे उत्पाद अक्सर अपेक्षाकृत आसानी से पच जाते हैं क्योंकि इनमें लैक्टोज़ की मात्रा कम होती है।

इसके अलावा बाजार में उपलब्ध लैक्टोज़-फ्री दूध और लैक्टेज़ सप्लीमेंट भी उपयोगी विकल्प हो सकते हैं।

Lactose Intolerance: कैल्शियम की कमी से बचना जरूरी

विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि बिना विकल्प अपनाए डेयरी उत्पादों को पूरी तरह छोड़ देना शरीर में कैल्शियम और विटामिन डी की कमी पैदा कर सकता है।

ऐसी स्थिति में तिल, पालक, सोयाबीन और बादाम दूध जैसे वैकल्पिक स्रोतों को आहार में शामिल करना जरूरी हो जाता है।

Lactose Intolerance: विज्ञान क्या कहता है?

विज्ञान के अनुसार वयस्क अवस्था में दूध न पचना कोई असामान्य स्थिति नहीं है। बल्कि जैविक दृष्टि से यह सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है। दरअसल वयस्क होने के बाद भी दूध को आसानी से पचा पाना एक विशेष जेनेटिक विशेषता है, जो हर व्यक्ति में मौजूद नहीं होती।

read also: Khabar zara hatke: मुजफ्फरपुर में शादी के बाद खुला दूल्हे का राज, 200 के नोट ने बिगाड़ दी विदाई

- Advertisement -
Ad imageAd image

Bhopal: CM डॉ. मोहन ने नए सीएम शुभेंदु को दी बधाई, कहा- आज से पश्चिम बंगाल में नवयुग का शुभारंभ

Bhopal: शुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के पहले मुख्यमंत्री

Disneyland Fair Clash : कोरबा के डिजनीलैंड मेले में हंगामा, दंपत्ति से मारपीट का आरोप

Disneyland Fair Clash : टिकट विवाद के बाद झूला कर्मचारियों और दंपत्ति

Bhopal: CM डॉ. मोहन ने नए सीएम शुभेंदु को दी बधाई, कहा- आज से पश्चिम बंगाल में नवयुग का शुभारंभ

Bhopal: शुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के पहले मुख्यमंत्री

PWD Commission Controversy: करोड़ों के भुगतान, कमीशनखोरी और मारपीट का CCTV आया सामने

PWD Commission Controversy: 4.65 करोड़ के भुगतान पर विवाद, PWD कर्मचारी पर

Illegal Land Encroachment: सरगुजा में अवैध कब्जों पर प्रशासन सख्त, बिहार रिजॉर्ट की जमीन की फिर हुई जांच

Illegal Land Encroachment: कमोदा स्थित बिहार रिजॉर्ट पहुंचा प्रशासनिक अमला, सरकारी जमीन

Sasaram: दावों के ‘मास्टर प्लान’ के बीच बदहाल शहर, जलजमाव और प्यास से जूझ रही जनता

Report: Avinash shrivastva Sasaram ऐतिहासिक शहर सासाराम की वर्तमान तस्वीर प्रशासनिक आश्वासनों

IPL Match Raipur: नवा रायपुर में आईपीएल का रोमांच, कल भिड़ेंगी आरसीबी और मुंबई इंडियंस

IPL Match Raipur: मैच से पहले मुंबई इंडियंस के खिलाड़ियों ने बहाया