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Sasaram: दावों के ‘मास्टर प्लान’ के बीच बदहाल शहर, जलजमाव और प्यास से जूझ रही जनता

Sasaram

Report: Avinash shrivastva

Sasaram ऐतिहासिक शहर सासाराम की वर्तमान तस्वीर प्रशासनिक आश्वासनों और जमीनी हकीकत के बीच की गहरी खाई को उजागर कर रही है। एक ओर स्थानीय विधायक सुनील लता कुशवाहा शहर के कायाकल्प के दावे कर रही हैं, तो दूसरी ओर आम जनता बुनियादी सुविधाओं—शुद्ध पेयजल और जल निकासी—के लिए तरस रही है।

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उल्लेखनीय है कि कुछ समय पूर्व विधायक सुनील लता कुशवाहा ने सासाराम की सूरत बदलने के लिए एक ‘मास्टर प्लान’ का खाका पेश किया था। दावा किया गया था कि इस योजना से शहर को जलजमाव और ड्रेनेज की पुरानी समस्या से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी। हालांकि, वर्तमान स्थिति विधायक के इन दावों पर सवालिया निशान लगा रही है। मानसून से पहले की हल्की बारिश ने ही सड़कों को तालाब में तब्दील कर दिया है, जिससे नगर निगम की तैयारियों की पोल खुल गई है।

Sasaram महादलित टोले में विधायक का दौरा, आश्वासन की फिर हुई बारिश

निरीक्षण के इसी क्रम में विधायक सुनील लता कुशवाहा आज सासाराम के महादलित टोले पहुंचीं। टोले की नारकीय स्थिति और बुनियादी सुविधाओं के अभाव को देख विधायक ने स्थानीय लोगों से बातचीत की। जब मीडिया ने उनसे ‘मास्टर प्लान’ की सुस्त रफ्तार और शहर की बदहाली पर सवाल किया, तो उन्होंने कहा:

“हम क्षेत्रों का निरंतर दौरा कर रहे हैं। फिलहाल महादलित टोला की समस्याओं का आकलन किया जा रहा है। जो भी कमियां हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाएगा। हमारा प्रयास अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास पहुँचाना है।”

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सासाराम के मुख्य बाजारों और रिहायशी इलाकों के हालात डरावने हैं। एक तरफ ड्रेनेज सिस्टम फेल होने से दुकानदारों और राहगीरों का जीना मुहाल है, वहीं दूसरी तरफ भीषण गर्मी के बीच पेयजल संकट ने ‘कोढ़ में खाज’ का काम किया है। स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश व्याप्त है; उनका कहना है कि हर बार केवल निरीक्षण और आश्वासनों का दौर चलता है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस काम नहीं दिखता। अब देखना यह है कि यह दौरा सासाराम के भाग्य को बदलता है या फिर यह भी महज एक राजनीतिक औपचारिकता बनकर रह जाता है।

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