National Lok Adalat: भोपाल में शनिवार 09 मई 2026 को नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली और मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के निर्देशानुसार यह आयोजन जिला न्यायालय भोपाल, सिविल न्यायालय बैरसिया और श्रम न्यायालयों में एक साथ होगा।
लोक अदालत का उद्देश्य लंबित मामलों का आपसी सहमति और त्वरित प्रक्रिया के माध्यम से समाधान कर नागरिकों को सुलभ एवं किफायती न्याय उपलब्ध कराना है।
National Lok Adalat: सुबह 10:15 बजे होगा शुभारंभ
नेशनल लोक अदालत का औपचारिक शुभारंभ सुबह 10:15 बजे किया जाएगा। मामलों के तेजी से निराकरण के लिए कुल 61 खंडपीठों का गठन किया गया है।
इन खंडपीठों में न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता और संबंधित पक्षकार मिलकर समझौते के आधार पर प्रकरणों का निपटारा करेंगे।
National Lok Adalat: 93 हजार से अधिक मामलों के समाधान का लक्ष्य
इस बार नेशनल लोक अदालत में कुल 93 हजार 686 प्रकरणों को निराकरण के लिए रखा गया है। इनमें न्यायालयों में लंबित मामले और प्रीलिटिगेशन स्तर के प्रकरण दोनों शामिल हैं।
लोक अदालत में आपराधिक शमनीय प्रकरण, चेक बाउंस मामले, बैंक रिकवरी, मोटर दुर्घटना दावा, वैवाहिक विवाद, विद्युत अधिनियम, श्रम न्यायालय संबंधी मामले और अन्य दीवानी प्रकरणों का समाधान किया जाएगा।
National Lok Adalat: 13 हजार से अधिक लंबित मामलों की होगी सुनवाई
न्यायालयों में लंबित कुल 13 हजार 186 रैफर्ड मामलों को लोक अदालत में रखा गया है। इनमें सबसे अधिक 4 हजार 189 मामले धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम यानी चेक बाउंस से जुड़े हैं।
इसके अलावा 3 हजार 9 आपराधिक शमनीय प्रकरण, 2 हजार 742 बैंक रिकवरी मामले, 1 हजार 939 मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण, 293 वैवाहिक विवाद, 650 विद्युत अधिनियम संबंधी और 233 श्रम न्यायालय से जुड़े मामले शामिल हैं।
National Lok Adalat: प्रीलिटिगेशन मामलों में भी होगा निपटारा
प्रीलिटिगेशन स्तर पर भी बड़ी संख्या में मामलों को लोक अदालत में रखा गया है। इनमें बैंक रिकवरी के 48 हजार 500 मामले प्रमुख हैं।
इसके साथ ही नगर निगम के जलकर और संपत्तिकर से जुड़े 26 हजार मामले, विद्युत अधिनियम के 3 हजार, यातायात चालान के 2 हजार और विभिन्न सरकारी विभागों के करीब 1 हजार मामले शामिल किए गए हैं।
National Lok Adalat: समय और धन की होगी बचत
नेशनल लोक अदालत के माध्यम से पक्षकारों को लंबी कानूनी प्रक्रिया से राहत मिलती है। समझौते के जरिए मामलों का निराकरण होने से समय और धन दोनों की बचत होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार लोक अदालतें न्याय व्यवस्था पर बढ़ते बोझ को कम करने के साथ नागरिकों को सौहार्दपूर्ण और त्वरित समाधान उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
read also: Hindi Journalism 200 Years: ‘उदन्त मार्त्तण्ड’ ने सदियों पहले तय कर दिया था पत्रकारिता का नैरेटिव





