BY: Yoganand Shrivastva
नई दिल्ली: पहलगाम में हुए आतंकी हमले को लेकर गुरुवार शाम बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने केंद्र सरकार से तीखे सवाल पूछे। इस हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी। बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने की। यह बैठक उस वक्त बुलाई गई जब एक दिन पहले ही केंद्र सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कई सख्त कदमों की घोषणा की थी।
सरकार ने पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों को निष्कासित करने, भारत-पाकिस्तान के बीच 1960 में हुई सिंधु जल संधि को निलंबित करने, अटारी लैंड ट्रांजिट पॉइंट को बंद करने और राजनयिक संबंधों में कटौती जैसे फैसलों की जानकारी दी।
बैठक में विपक्ष ने विशेष रूप से उस स्थान पर सुरक्षा बलों की अनुपस्थिति पर सवाल उठाया, जहां हमला हुआ। यह इलाका बैसारन का पर्यटन स्थल है, जो पहलगाम के पास स्थित है। यह सवाल सबसे पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उठाया, जिसके बाद राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह सहित कई नेताओं ने इस पर अपनी सहमति जताई।
विपक्ष का सवाल था—जब बैसारन में पहले से ही पर्यटक पहुंच रहे थे, तो वहां सुरक्षा बल तैनात क्यों नहीं किए गए थे?
सरकार की ओर से जवाब में कहा गया कि अमरनाथ यात्रा हर साल जून में शुरू होती है और तब इस मार्ग पर सुरक्षाबलों की तैनाती की जाती है। बैसारन इसी मार्ग पर एक महत्वपूर्ण विश्राम स्थल है। इस बार, 20 अप्रैल से ही कुछ स्थानीय टूर ऑपरेटरों ने पर्यटकों को वहां ले जाना शुरू कर दिया, जिसकी जानकारी न तो स्थानीय प्रशासन को दी गई और न ही सुरक्षा एजेंसियों को। इस कारण वहां कोई तैनाती नहीं हो पाई।
विपक्ष ने एक और सवाल उठाया—जब भारत के पास जल भंडारण की क्षमता नहीं है, तो सिंधु जल संधि को निलंबित करने का क्या औचित्य है?
इसके जवाब में सरकार ने कहा कि यह फैसला तत्काल प्रभाव के लिए नहीं बल्कि रणनीतिक और प्रतीकात्मक उद्देश्य से लिया गया है।
सरकार की ओर से कहा गया, “यह निर्णय सरकार की सख्त मंशा को दर्शाता है और यह एक कड़ा संदेश देने के लिए लिया गया है कि आगे हमारी नीति कैसी रहेगी।”
बैठक की शुरुआत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मौजूदा सुरक्षा स्थिति की जानकारी देकर की। इसके बाद खुफिया ब्यूरो के निदेशक तपन डेका ने 20 मिनट की एक प्रस्तुति दी, जिसमें हमले की समयरेखा, खुफिया जानकारियाँ और अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी दी गई।
इस बैठक में विभिन्न दलों के प्रमुख नेता मौजूद थे। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के अलावा भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सुप्रिया सुले, एनसीपी के प्रफुल पटेल, बीजेडी के सस्मित पात्र, शिवसेना के श्रीकांत शिंदे, राजद के प्रेमचंद गुप्ता, डीएमके के तिरुची शिवा और सपा के रामगोपाल यादव भी बैठक में शामिल हुए।
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