रिपोर्टर : कुशाल ठाकुर
Mahidpur उज्जैन जिले के महिदपुर क्षेत्र में अवैध लकड़ी के काले कारोबार के खिलाफ प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए तहसीलदार संतुष्टि पाल ने ‘लेडी सिंघम’ के अंदाज में वन विभाग के साथ मिलकर संयुक्त दबिश दी। इस अचानक हुई कार्रवाई से क्षेत्र के भूमाफियाओं और अवैध आरा मशीन संचालकों में हड़कंप मच गया है।

Mahidpur बिना ट्रांजिट पास के मिला लकड़ी का भारी स्टॉक
तहसीलदार संतुष्टि पाल के नेतृत्व में फॉरेस्ट रेंजर मदन सिंह मोहरे और डिप्टी रेंजर अंतर सिंह की संयुक्त टीम ने पूरी रणनीति के साथ महिदपुर और झारड़ा के संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी की। टीम ने विशेष रूप से महिदपुर स्थित शिप्रा तोल कांटा के पास रुद्र खेड़ा आरा मशीन पर छापा मारा। जांच के दौरान मौके पर भारी मात्रा में ऐसी लकड़ी बरामद हुई, जिसके परिवहन या भंडारण के लिए कोई भी वैध ट्रांजिट पास (TP) या सरकारी दस्तावेज मौजूद नहीं थे।

Mahidpur दस्तावेजों में हेराफेरी और अवैध भंडारण का खुलासा
जांच में यह तथ्य सामने आया कि आरा मशीन पर जितनी लकड़ी रखने की आधिकारिक अनुमति दी गई थी, मौके पर मौजूद स्टॉक उससे कहीं अधिक था। जब प्रशासन ने मशीन संचालकों से अतिरिक्त लकड़ी के स्रोतों और दस्तावेजों के बारे में पूछताछ की, तो वे कोई भी संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। अधिकारियों के अनुसार, यह स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन और वन संपदा की अवैध तस्करी का मामला है।

Mahidpur जब्ती की कार्रवाई और कानूनी शिकंजा
घंटों चली इस मैराथन जांच के बाद, राजस्व और वन विभाग की टीम ने अवैध लकड़ी को अपने कब्जे में ले लिया है। मौके पर ही विस्तृत पंचनामा तैयार कर आरा मशीन संचालक के खिलाफ संबंधित अधिनियमों के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। तहसीलदार संतुष्टि पाल ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अवैध उत्खनन, कटाई या परिवहन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में भी ऐसी कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
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