बिलासपुर: पीएम आवास योजना में बड़ा घोटाला! मृतक के नाम पर निकली तीनों किस्तें, ग्रामीणों को मिला सिर्फ आश्वासन

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रिपोर्टर: प्रांशु क्षत्रिय, अपडेटः योगानंद श्रीवास्तव

बिलासपुर, छत्तीसगढ़: प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) को लेकर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के मस्तूरी जनपद में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां ग्राम कर्रा में योजना के नाम पर फर्जीवाड़ा, रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार का ऐसा खेल खेला गया है, जिसने गरीबों की उम्मीदों को पूरी तरह तोड़ दिया है।

कागज़ों पर बने पक्के मकान, असल में मिट्टी की झोपड़ी

सरकार इस योजना के तहत पात्र परिवारों को पक्का घर बनाने के लिए तीन किश्तों में ₹1,20,000 की सहायता राशि देती है। लेकिन जब स्वदेश न्यूज़ की टीम मौके पर पहुंची, तो हकीकत कुछ और ही थी। कई ग्रामीण आज भी झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं, जबकि रिकॉर्ड में उनके मकान पक्के दिखाए गए हैं।

अंजोरा बाई और श्याम बाई यादव जैसी बुजुर्ग महिलाएं अपनी जर्जर झोपड़ियों में जीवन बिता रही हैं, लेकिन प्रशासन के दस्तावेजों में उनका मकान “निर्मित” बताया गया है। गीता बाई का कहना है कि उन्हें एक भी किश्त नहीं मिली, जबकि फाइलों में पूरा भुगतान हो चुका है।

मृत व्यक्ति के नाम पर जारी हुईं तीनों किस्तें!

सबसे चौंकाने वाली बात तब सामने आई जब एक ग्रामीण शिवकुमार ने बताया कि उसके पिता की मृत्यु कई वर्ष पहले हो चुकी है, फिर भी उनके नाम पर प्रधानमंत्री आवास योजना की तीनों किश्तें निकाल ली गईं। वह सवाल करते हैं – “जब मेरे पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं, तो बैंक ने पैसे किसके हस्ताक्षर पर दिए? क्या मृतकों के फर्जी दस्तावेज तैयार कर पैसे हड़पे जा रहे हैं?”

कौन है जिम्मेदार? ग्राम पंचायत से लेकर बैंक तक की मिलीभगत

गांव के सरपंच प्रतिनिधि टीकम कुमार कौशिक ने बताया कि ऐसे 10 से ज्यादा मामले सामने आए हैं, जहां कागज़ों में मकान तैयार हैं, लेकिन ज़मीन पर सिर्फ खाली प्लॉट या अधूरी नींव ही नजर आती है। ग्रामीणों का आरोप है कि रोजगार सहायक, पंचायत सचिव, जनपद अधिकारी और स्थानीय बैंक कर्मचारी आपस में मिलीभगत कर फर्जी हस्ताक्षर करवा लेते हैं और ग्रामीणों को जानकारी तक नहीं दी जाती।

ग्रामीणों की गुहार, प्रशासन की खामोशी

पीड़ितों ने बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल और जिला सीईओ संदीप अग्रवाल को लिखित में शिकायत दी है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। हालांकि अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

कलेक्टर संजय अग्रवाल ने मीडिया को बताया कि, “मामले की जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।” लेकिन सवाल यह है कि क्या प्रशासन की यह जांच सिर्फ कागज़ों तक सीमित रह जाएगी?

अंतिम सवाल…

  • क्या गरीबों के नाम पर मिलने वाली योजनाएं भ्रष्टाचारियों की जेब भरने का जरिया बन चुकी हैं?
  • क्या मृतकों के नाम पर भी सरकारी धन का गबन होता रहेगा?
  • और क्या जिला प्रशासन अब भी गहरी नींद में सोया रहेगा?

स्वदेश न्यूज की टीम इस घोटाले की परतें खोलती रहेगी, और जब तक जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होती, हम सवाल पूछते रहेंगे

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