केंद्रीय गृह मंत्रालय की उच्च स्तरीय टीम प्रभावित गांव पहुंची
जम्मू-कश्मीर: कभी आतंक से दहशत में रहने वाला जम्मू-कश्मीर राज्य इनदिनों के रहस्यमयी बीमारी के कारण चर्चा हैं है। राजौरी जिले में इनदिनों एक रहस्यमयी बीमारी ने तो दहशत मचा रखी है। राजौरी के बधाल गांव में रहस्यमयी बीमारी से हो रही मौतों की जांच चल रही है। जहां 7 दिसंबर से अब तक 17 लोगों की जान जा चुकी है। बताया जाता है कि खाना-खाने के बाद एक परिवार के सभी सदस्य बीमार होते हैं और इलाज के दौरान उनकी मौत हो जाती है। खबरों के मुताबिक मरीजों ने अस्पताल में भर्ती होने के कुछ दिनों के भीतर ही बुखार, दर्द, मतली और बेहोशी की शिकायत की और फिर उनकी मौत हो गई।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक उच्च स्तरीय टीम जांच के लिए भेजी है, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा नियुक्त गृह मंत्रालय के निदेशक रैंक के अधिकारी की अध्यक्षता में ये उच्च स्तरीय अंतर-मंत्रालयी टीम रविवार को बदहाल गांव में हुई रहस्यमय मौतों की जांच करने के लिए राजौरी पहुंची है। विभिन्न मंत्रालयों और विशेषज्ञों से युक्त 16 सदस्यीय ये टीम रविवार दोपहर जम्मू पहुंचने के बाद राजौरी पहुंची। अधिकारियों ने बताया कि राजौरी पहुंचने के बाद निदेशक रैंक के अधिकारी जी के गर्ग की अध्यक्षता वाली अंतर-मंत्रालयी टीम ने स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) की एक टीम के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की, जो पिछले कुछ दिनों से सीमावर्ती जिले में डेरा डाले हुए है। टीम का यह दौरा रहस्यमय मौतों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच हुआ है, जिससे क्षेत्र में दहशत फैल गई है। इस अंतर-मंत्रालयी टीम का गठन और इसे जम्मू-कश्मीर के इस सीमावर्ती जिले में तैनात करने का आदेश गृह मंत्री अमित शाह ने राजौरी के बधाल गांव में रहस्यमय मौतों की चल रही जांच में शामिल होने के लिए दिया था, जहां 7 दिसंबर से अब तक 17 लोगों की जान जा चुकी है। ये टीम आज प्रभावित गांव बधाल पहुंची है। जहां फील्ड जांच और मौके पर स्थिति की समीक्षा कर रही है।
जांच का उद्देश्य मौतों के कारण पता लगाना, प्रभावितों को राहत प्रदान करना
बुधल के विधायक जावेद इकबाल चौधरी ने कहा, “टीम के निष्कर्ष मौतों के पीछे के रहस्य को उजागर करने और आगे की त्रासदियों को रोकने में महत्वपूर्ण होंगे। उन्होंने कहा कि जांच पहले से ही चल रही है और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला खुद जांच में प्रगति की दिन प्रतिदिन समीक्षा कर रहे हैं। देश के कुछ सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों को मौतों के कारणों को समझने के लिए बुलाया गया है। इससे पहले, जम्मू-कश्मीर सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि जांच और नमूनों से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि ये घटनाएं बैक्टीरिया या वायरल मूल की संक्रामक बीमारी के कारण नहीं हुई थीं और इसमें सार्वजनिक स्वास्थ्य का कोई पहलू नहीं था।
एनसीडीसी की जांच में वायरस या बैक्टीरिया नहीं
बधाल गांव से एकत्र किए गए नमूनों का राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी), राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान, पुणे और अन्य प्रयोगशालाओं में विश्लेषण किया गया है। परीक्षण के परिणामों में कोई वायरस या बैक्टीरिया नहीं दिखा, जिससे किसी भी संक्रामक बीमारी की संभावना को खारिज कर दिया गया। हालांकि, परीक्षणों से यह साबित हुआ कि विश्लेषण किए गए नमूनों में विषाक्त पदार्थ पाए गए थे। रहस्यमय बीमारी के सभी पीड़ित तीन परिवारों से हैं, जिससे संदेह पैदा होता है कि इसमें कोई गड़बड़ी है।
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