by: vijay nandan
strait-of-hormuz : ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव के बीच पूरी दुनिया की नजरें ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) पर टिक गई हैं। यह महज एक समुद्री रास्ता नहीं है, बल्कि दुनिया की अर्थव्यवस्था की धड़कन है। वैश्विक ऊर्जा व्यापार का लगभग 20 फीसदी हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज जो समुद्री गलियारा आधुनिक दुनिया पर राज कर रहा है, उसका निर्माण इंसानों के धरती पर कदम रखने से लाखों साल पहले ही हो गया था? आइए जानते हैं इसके बनने की पूरी भूगर्भीय कहानी।
strait-of-hormuz : दुनिया के लिए क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी (Persian Gulf) को अरब सागर और ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। यह मध्य पूर्व के तेल उत्पादक देशों के लिए दुनिया भर में अपना कच्चा तेल पहुंचाने का सबसे प्रमुख और इकलौता जलमार्ग है। इसके रणनीतिक महत्व के कारण ही यह हमेशा से महाशक्तियों के बीच टकराव का केंद्र रहा है। वर्तमान में यह अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक और सैन्य खींचतान का सबसे बड़ा पॉइंट बन चुका है।
strait-of-hormuz : गोंडवाना लैंड के टूटने से शुरू हुई निर्माण की कहानी
वैज्ञानिकों और भूवैज्ञानिकों के अध्ययनों के अनुसार, आज से लगभग 6000 साल पहले फारस की खाड़ी का कोई अस्तित्व नहीं था। उस समय न तो अरब प्रायद्वीप था और न ही ईरान। धरती की भौगोलिक संरचना आज से बिल्कुल अलग थी। आज का अरब प्रायद्वीप लाखों वर्ष पहले ‘गोंडवाना’ नामक एक विशाल दक्षिणी महाद्वीप का हिस्सा हुआ करता था। इसके उत्तर में विशाल टेथीस महासागर (Tethys Ocean) था, जो इसे यूरेशियाई प्लेट से अलग करता था।

लगभग 180 मिलियन (18 करोड़) वर्ष पहले गोंडवाना महाद्वीप में दरार आनी शुरू हुई। इसके टूटने से भारतीय और अरब टेक्टोनिक प्लेटें उत्तर की दिशा में खिसकने लगीं। लाखों सालों की इस धीमी लेकिन निरंतर गति के कारण दोनों प्लेटें यूरेशियाई प्लेट की ओर बढ़ती रहीं, जिससे उनके बीच मौजूद टेथीस सागर धीरे-धीरे संकरा होता चला गया।
strait-of-hormuz : जाग्रोस पर्वत और फारस की खाड़ी का उदय
प्लेटों के खिसकने की यह प्रक्रिया जब अपने चरम पर पहुंची, तो अरब प्रायद्वीप की सीधी टक्कर यूरेशिया से हुई। इस भीषण भूगर्भीय टक्कर के कारण पृथ्वी की ऊपरी परत (Crust) मुड़ गई और बड़ी-बड़ी चट्टानें विशाल पर्वतों में तब्दील हो गईं। इसी से ‘जाग्रोस पर्वतमाला’ का निर्माण हुआ। यह विशाल पर्वत श्रृंखला आज तुर्की से लेकर ईरान और फारस की खाड़ी तक फैली हुई है।
जब अरब प्रायद्वीप का उत्तरी किनारा पहाड़ों के रूप में ऊपर उठा, तो उसके ठीक दक्षिण का बेसिन दबाव के कारण नीचे धंस गया। यही निचला और धंसा हुआ हिस्सा बाद में पानी से भर गया, जिसे आज हम ‘फारस की खाड़ी’ के रूप में जानते हैं। यह खाड़ी औसतन 110 मीटर गहरी और लगभग 340 किलोमीटर चौड़ी है। इसी खाड़ी की तलहटी में वह बेशकीमती कच्चा तेल छिपा हुआ है, जो टेथीस सागर के समय से वहां जमा हो रहा था।
strait-of-hormuz : कैसे बना मात्र 40 किमी का संकरा ‘होर्मुज’?
जाग्रोस पर्वत इस पूरे बेसिन की उत्तरी सीमा तय करते हैं। दक्षिण-पूर्वी सिरे पर, जहां ये विशाल पर्वत समुद्र से मिलते हैं, वहां भौगोलिक दबाव के कारण अरब प्रायद्वीप और ईरान का तट एक-दूसरे के बेहद करीब आ जाते हैं। यह दूरी सिमटकर महज 40 किलोमीटर रह जाती है।
समुद्र के बीच इसी 40 किलोमीटर के सबसे संकरे हिस्से को होर्मुज जलडमरूमध्य कहा जाता है। लाखों सालों की भौगोलिक उथल-पुथल से बना यह प्राकृतिक समुद्री रास्ता आज न सिर्फ वैश्विक व्यापार को नियंत्रित करता है, बल्कि दुनिया की महाशक्तियों की कूटनीति की दिशा भी तय करता है।





