सामुदायिक भवन बना अस्थायी स्कूल
रिपोर्टर: सुनील कुमार ठाकुर
बलरामपुर जिले के शिक्षा व्यवस्था की दुर्दशा को उजागर करती एक गंभीर तस्वीर सामने आई है। जिले के कपोत गांव में पिछले दो वर्षों से प्राथमिक विद्यालय का भवन जर्जर हालत में पड़ा है, जिससे विद्यालय का संचालन अब गांव के सामुदायिक भवन के एक छोटे से कमरे में किया जा रहा है।
गांव के प्राथमिक विद्यालय में कुल 53 छात्र नामांकित हैं। सामुदायिक भवन के एकमात्र छोटे कमरे में सभी बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ाई कराना संभव नहीं हो पा रहा है। हालात इस कदर बदतर हैं कि वर्तमान में चल रही कक्षा पहली से चौथी तक की परीक्षाएं भी एक साथ आयोजित नहीं की जा पा रही हैं। विद्यालय के शिक्षक ने बताया कि स्थान की कमी के कारण हर कक्षा की परीक्षा अलग-अलग समय पर लेनी पड़ रही है, जिससे बच्चों की पढ़ाई और मूल्यांकन दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
इस मुद्दे पर जब जिला पंचायत उपाध्यक्ष धीरज सिंह देव से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि गांव में जल्द ही नए विद्यालय भवन के निर्माण के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। वहीं, जिला शिक्षा अधिकारी का कहना है कि कपोत गांव के लिए नए स्कूल भवन का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। लेकिन अभी तक उसकी स्वीकृति नहीं मिली है, जिस कारण भवन निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। जैसे ही प्रस्ताव को स्वीकृति मिलती है, गांव में नया विद्यालय भवन बनवाया जाएगा।
यह स्थिति न केवल शिक्षा के अधिकार अधिनियम की मूल भावना के विरुद्ध है, बल्कि ग्रामीण बच्चों के भविष्य के साथ एक बड़ा खिलवाड़ भी है। शासन-प्रशासन को जल्द से जल्द इस दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि बच्चों को बेहतर और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध हो सके।





