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“संविधान निर्माण: एक सामूहिक प्रयास” – रक्षक मोर्चा का जनजागरण अभियान जारी

BY: Yoganand Shrivastva

ग्वालियर, सामाजिक न्याय मंच के तत्वावधान में रक्षक मोर्चा द्वारा चलाए जा रहे जनजागरण अभियान की अगली कड़ी में आज दीनदयाल नगर एवं शताब्दीपुरम में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इससे पहले यह अभियान हरि शंकरपुरम कॉलोनी में भी संपन्न हो चुका है। क्षेत्रीय जनता ने कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया और संविधान से जुड़ी कई नई जानकारियों पर आश्चर्य भी व्यक्त किया।

रक्षक मोर्चा ने अपने वक्तव्य में स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान किसी एक व्यक्ति का कार्य नहीं बल्कि अनेक विद्वानों, नेताओं और विशेषज्ञों के सामूहिक परिश्रम का परिणाम है। उन्होंने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर को संविधान निर्माता के रूप में प्रस्तुत किया गया, जबकि संविधान सभा में कई अन्य महत्त्वपूर्ण व्यक्तित्वों की भी अहम भूमिका रही थी।

इस संदर्भ में मंच ने भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद, प्रेम बिहारी रायजादा (जिन्होंने संविधान को हस्तलिखित रूप दिया), सर बेनेगल नरसिंह राव (संविधान के विधिक प्रारूप के मुख्य वास्तुकार), और लेफ्टिनेंट कर्नल ब्रजराज नारायण जैसे अनेक योगदानकर्ताओं को भी स्मरण किया। खासतौर पर सर बी. एन. राव ने अकेले ही संविधान के 343 अनुच्छेदों का प्रारूप तैयार किया था, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी अपने एक संबोधन में स्वीकार किया है।

रक्षक मोर्चा ने सवाल उठाया कि आखिर क्यों अब तक इन महान योगदानकर्ताओं को नजरअंदाज कर केवल एक जाति विशेष के व्यक्ति को केंद्र में रखा गया? उन्होंने यह भी कहा कि संविधान सभा में 26 अनुसूचित जाति वर्ग के सदस्य मौजूद थे, जिनमें पूर्व उप-प्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम का योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय था। उन्होंने दलितों और पिछड़े वर्गों के लिए नीति निर्माण, आरक्षण और योजनाओं के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाई, जबकि डॉ. अंबेडकर ने केवल महार जाति के लिए आरक्षण की मांग की थी। बाबू जगजीवन राम ने 86 जातियों को एससी वर्ग में शामिल कराने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

रक्षक मोर्चा ने यह भी बताया कि प्रारंभिक संविधान ड्राफ्ट तैयार करने की जिम्मेदारी सर बी. एन. राव की थी, जिसे उन्होंने ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष डॉ. अंबेडकर को सौंपा। डॉ. अंबेडकर ने भी संविधान सभा की अंतिम बैठक में सार्वजनिक रूप से यह स्वीकारा कि यदि सर बी. एन. राव न होते, तो संविधान का निर्माण संभव नहीं था।

इसलिए सामाजिक न्याय मंच ने सरकार से सर बी. एन. राव को संविधान निर्माता के रूप में मान्यता देने की मांग की है।

आज के कार्यक्रम में अखिलेश पांडे, अमित दुबे, ध्यानेंद्र शर्मा, नितिन शुक्ला, अमित खेमरिया, टिंकुल जादौन, रोशन भदौरिया, मृगेंद्र पाठक, शशांक त्रिवेदी, गौरव शर्मा, छत्रपाल सिंह तोमर एवं शाहिद सहित करीब 50 कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

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