‘भारत कुमार’ मनोज कुमार: जिनकी देशभक्ति फिल्मों ने सिनेमा में रच दिया इतिहास

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BY: Yoganand Shrivastva


24 जुलाई को हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता मनोज कुमार की पहली जन्म जयंती है। इसी साल 4 अप्रैल को 87 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ। मनोज कुमार एक ऐसे अभिनेता थे जिनकी फिल्में देशभक्ति की भावना से सराबोर होती थीं और जिन्होंने दर्शकों के दिलों में एक अमिट छाप छोड़ी।

उनका असली नाम हरिकिशन गिरि गोस्वामी था, लेकिन सिनेमा जगत में उन्हें ‘भारत कुमार’ के नाम से जाना गया। अभिनय से लेकर निर्देशन तक, उन्होंने हर क्षेत्र में उत्कृष्टता दिखाई। अपने चार दशक लंबे करियर में उन्होंने ना केवल कई सुपरहिट फिल्में दीं, बल्कि सिनेमा को एक विचारशील और राष्ट्रवादी दृष्टिकोण भी दिया।


‘उपकार’ के पीछे था लाल बहादुर शास्त्री का सुझाव

मनोज कुमार की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘उपकार’ (1967) केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि एक विचार थी। भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने उन्हें ‘जय जवान जय किसान’ नारे पर फिल्म बनाने का सुझाव दिया था। इस प्रेरणा से जन्मी ‘उपकार’ उस साल की सबसे बड़ी हिट साबित हुई।

इस फिल्म ने सिर्फ दर्शकों का दिल नहीं जीता, बल्कि आलोचकों से भी खूब सराहना बटोरी। फिल्म में “मेरे देश की धरती सोना उगले” जैसे गीत आज भी देशभक्ति की मिसाल माने जाते हैं। यह मनोज कुमार की पहली निर्देशित फिल्म थी, जिसने उन्हें एक सफल निर्देशक के रूप में स्थापित किया।


सम्मान और उपलब्धियाँ

मनोज कुमार को उनकी देशभक्ति आधारित फिल्मों के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा गया:

  • राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (उपकार के लिए)
  • पद्मश्री (1992)
  • दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड (2016)
  • 8 फिल्मफेयर अवॉर्ड (जिसमें ‘उपकार’ को 4 अवॉर्ड मिले: बेस्ट फिल्म, बेस्ट डायरेक्टर, बेस्ट स्टोरी और बेस्ट डायलॉग)

‘भारत कुमार’ की पहचान कैसे बनी?

फिल्मों में मनोज कुमार का नाम ‘भारत’ रखा जाता था, खासकर उपकार, पूरब और पश्चिम, रोटी कपड़ा और मकान, क्रांति जैसी फिल्मों में। उनके राष्ट्रवादी किरदार इतने प्रभावशाली थे कि लोग उन्हें रियल लाइफ में भी ‘भारत कुमार’ कहने लगे। यह उपनाम उनकी देशभक्ति और अभिनय दोनों की एक अमिट छवि बन गया।


फिल्मी सफर के कुछ और सुनहरे पल

  • ‘उपकार’ में उनके साथ प्रेम चोपड़ा, आशा पारेख, प्राण और कामिनी कौशल जैसे सितारे थे।
  • इस फिल्म का तेलुगू रीमेक भी बना जिसका नाम ‘बड़ी पंतुलु’ था।
  • ‘क्रांति’, ‘पूरब और पश्चिम’, ‘रोटी कपड़ा और मकान’ जैसी फिल्में आज भी भारतीय सिनेमा की धरोहर मानी जाती हैं।

एक अभिनेता, एक विचार

मनोज कुमार सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे, बल्कि भारतीय सिनेमा में देशभक्ति की आत्मा थे। उनकी फिल्में आज भी युवाओं को प्रेरणा देती हैं और भारत के गौरवशाली अतीत की झलक दिखाती हैं।

उनकी यादें, उनके किरदार और उनका योगदान हमेशा भारतीय फिल्म इतिहास में अमर रहेंगे।

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