,

Clean Drinking Water Crisis: आज़ादी के दशकों बाद भी शुद्ध पानी से दूर जीवन

- Advertisement -
Ad imageAd image
Clean Drinking Water Crisis

Clean Drinking Water Crisis: रोज़ाना आधा किलोमीटर का सफर, तब कहीं बुझती है प्यास

Clean Drinking Water Crisis: कोरिया जिले के बैकुंठपुर जनपद के ग्राम पंचायत सरईगहना का कोरवापारा आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव की दर्दनाक तस्वीर पेश करता है। यहां संरक्षित जनजाति कोरवा के 13 परिवार निवास करते हैं, लेकिन शुद्ध पेयजल उनके लिए अब भी एक सपना है। गांव में लगा एकमात्र हैंडपंप लाल रंग का पानी उगलता है, जो पीने योग्य नहीं है।


ऐसे में ग्रामीणों को अपनी प्यास बुझाने के लिए करीब आधा किलोमीटर दूर पहाड़ी पार करनी पड़ती है। गेज नदी के किनारे बने एक छोटे से पोखर से पानी निकालकर लाना उनकी मजबूरी है। इस पानी को पहले कपड़े से छाना जाता है, फिर सिर पर रखकर घर तक लाया जाता है। इस कठिन प्रक्रिया में महिलाएं, पुरुष और छोटे-छोटे बच्चे सभी रोज़ाना शामिल होते हैं।

Clean Drinking Water Crisis: योजनाएं कागजों में, जमीनी हकीकत में संघर्ष जारी

सरकार द्वारा चलाई जा रही कई योजनाएं, जैसे जल जीवन मिशन, का लाभ अब तक इस गांव तक नहीं पहुंच पाया है। कई बार प्रशासन से गुहार लगाने के बावजूद यहां न तो साफ पानी की कोई स्थायी व्यवस्था हो सकी है और न ही नल कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं।
झोपड़ीनुमा घरों में रहने वाले ये कोरवा आदिवासी आज भी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कब तक ये लोग अपने अधिकारों के लिए यूं ही जूझते रहेंगे?

read also: MP: TET मामले में 13 मई को सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई, शिक्षकों के हित में सरकार मजबूती से खड़ी: CM डॉ यादव