22 साल की आजादी का जश्न: भालू जैस्मीन ने तय किया दर्द से सुकून तक का सफर

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22 साल की आजादी का जश्न: भालू जैस्मीन ने तय किया दर्द से सुकून तक का सफर

आगरा के कीठम भालू संरक्षण गृह में रहने वाली बुजुर्ग भालू जैस्मीन ने स्वतंत्र जीवन के 22 साल पूरे कर लिए हैं। 2003 में वाइल्डलाइफ एसओएस द्वारा बचाई गई जैस्मीन को पहले ‘डांसिंग भालू’ के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। आज जैस्मीन एक सुरक्षित और खुशहाल जीवन जी रही है।


कैसे हुआ था जैस्मीन का रेस्क्यू?

  • रेस्क्यू वर्ष: 2003
  • स्थिति: जब जैस्मीन को बचाया गया, तब वह एक शावक थी।
  • अत्याचार: उसकी मां से अलग कर, गर्म लोहे की छड़ से थूथन में छेद कर रस्सी डाली गई थी।
  • उद्देश्य: सड़कों पर उसे डांस करवा कर पैसे कमाए जाते थे।
  • शारीरिक हालात: रेस्क्यू के समय उसके शरीर पर कई घाव थे।

कीठम में अब कैसी है जैस्मीन की जिंदगी?

आज जैस्मीन आगरा के कीठम भालू संरक्षण गृह में बुजुर्ग भालुओं में शामिल है, और अपनी प्राकृतिक गतिविधियों का आनंद ले रही है।

उसे क्या-क्या पसंद है:

  • दीमक और कीड़े-मकोड़े खोदकर खाना
  • शहद, नारियल और खजूर से भरे फीडर से खेलना
  • गर्मियों में आइस-पॉप्सिकल्स और ठंडे पानी वाले पूल में मस्ती
  • झूले पर लेटकर एयर कूलर की हवा में सो जाना

संघर्ष से सम्मान तक: जैस्मीन की प्रेरणादायक कहानी

संस्थापकों की भावनाएं

  • कार्तिक सत्यनारायण (सह-संस्थापक, वाइल्डलाइफ एसओएस):
    “जैस्मीन को शावक से वरिष्ठ सदस्य बनते देखना एक भावुक सफर रहा है।”
  • डॉ. इलियाराजा एस (उप निदेशक, पशु चिकित्सा सेवाएं):
    “दो दशकों तक जैस्मीन की देखभाल चुनौतीपूर्ण लेकिन संतोषजनक रही है।”
  • गीता शेषमणि (सह-संस्थापक और सचिव):
    “जैस्मीन ने अपनी जिंदगी में गहरे घावों से निकलकर प्यार और सम्मान पाया है।”

जैस्मीन की कहानी सिर्फ एक भालू की नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति करुणा और संरक्षण के प्रयासों की मिसाल है। 22 साल पहले जिस जैस्मीन को दर्द और शोषण का सामना करना पड़ा था, आज वही भालू सम्मान और सुकून के साथ जीवन जी रही है। यह कहानी हमें याद दिलाती है कि हर जीव को जीने का हक है — सम्मान और सुरक्षा के साथ।

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