मध्य प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) से जुड़ी दुर्घटनाओं के मामले में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। राज्यसभा में पेश किए गए आधिकारिक डेटा के अनुसार, 2024 में प्रदेश में ईवी दुर्घटनाओं में 89 लोगों की मौत हुई और 868 घायल हुए। इनमें कुल 663 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जो पिछले वर्ष (2023) के आंकड़ों के लगभग बराबर हैं।
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राष्ट्रीय स्तर पर एमपी की स्थिति
- उत्तराखंड (369 मौतें) इस मामले में शीर्ष पर है।
- मध्य प्रदेश 8वें स्थान पर, जहां बिहार (230), महाराष्ट्र (154), राजस्थान (144) जैसे राज्य भी शामिल हैं।
- राष्ट्रीय स्तर पर 2024 में ईवी दुर्घटनाओं में 1,947 मौतें और 9,318 घायल हुए।
पिछले वर्षों की तुलना में सुधार
हालांकि, एमपी में ईवी दुर्घटनाओं और मौतों में गिरावट का रुझान दिखा:
- 2022: 1,067 दुर्घटनाएं, 250 मौतें
- 2023: 670 दुर्घटनाएं, 140 मौतें
- 2024: 663 दुर्घटनाएं, 89 मौतें
सरकार की चिंता और कदम
सड़क परिवहन मंत्रालय ने ईवी बैटरी सुरक्षा को लेकर नए मानक लागू किए हैं:
- बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) और घटकों के लिए सख्त नियम (1 दिसंबर 2022 से लागू)।
- ई-रिक्शा, दोपहिया, चार पहिया वाहनों के लिए उत्पादन अनुरूपता (COP) अनिवार्य।
- राज्यों को eDAR पोर्टल के माध्यम से दुर्घटना डेटा रिपोर्ट करने का निर्देश।
विशेषज्ञों की राय
परिवहन विशेषज्ञ डॉ. राजीव शर्मा कहते हैं, “ईवी दुर्घटनाओं में बैटरी विस्फोट और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की खामियां प्रमुख कारण हैं। सरकार को ड्राइवर ट्रेनिंग और तकनीकी ऑडिट पर ध्यान देना चाहिए।”
क्यों महत्वपूर्ण है यह खबर?
- सुरक्षा चेतावनी: ईवी उपयोगकर्ताओं को बैटरी और वाहन रखरखाव के प्रति सजग रहने की आवश्यकता।
- नीतिगत बदलाव: सरकार के नए मानक भविष्य में दुर्घटनाएं कम करने में मददगार हो सकते हैं।
- राज्यों की जिम्मेदारी: डेटा रिपोर्टिंग और सार्वजनिक जागरूकता अभियानों की आवश्यकता।
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