पीयूष गोयल का बड़ा खुलासा: क्यों भारतीय स्टार्टअप्स सिर्फ फूड डिलीवरी बना रहे, जबकि चीन कर रहा टेक इनोवेशन?

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नई दिल्ली: केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भारतीय और चीनी स्टार्टअप्स के बीच के अंतर को उजागर करते हुए चिंता जताई कि भारत के स्टार्टअप्स मुख्य रूप से फूड डिलीवरी, फैंटेसी स्पोर्ट्स और शॉर्ट वीडियो एप्स तक सीमित हैं, जबकि चीन इलेक्ट्रिक वाहन (EV), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर्स और रोबोटिक्स जैसी उन्नत तकनीकों पर काम कर रहा है।

भारतीय स्टार्टअप्स को चाहिए टेक्नोलॉजी पर फोकस

दिल्ली में आयोजित ‘स्टार्टअप महाकुंभ’ के दूसरे संस्करण में बोलते हुए, गोयल ने कहा,
“हम सिर्फ फूड डिलीवरी और हाइपर-लोकल डिलीवरी एप्स बना रहे हैं, जहां अमीरों को घर बैठे खाना मिल जाए, लेकिन चीन EV, AI और सेमीकंडक्टर्स जैसी गहरी टेक्नोलॉजी में निवेश कर रहा है।”

उन्होंने एक स्लाइड प्रेजेंटेशन दिखाते हुए बताया कि भारतीय स्टार्टअप्स फैंसी आइसक्रीम, इंस्टेंट ग्रोसरी डिलीवरी, फैंटेसी स्पोर्ट्स, और इन्फ्लुएंसर इकोनॉमी पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जबकि चीन रोबोटिक्स, ऑटोमेशन, वैश्विक लॉजिस्टिक्स, और गहरे तकनीकी नवाचार में निवेश कर रहा है।

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घरेलू निवेश बढ़ाने पर जोर

मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारतीय स्टार्टअप्स को विदेशी कंपनियों के बजाय घरेलू निवेश से बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई भारतीय युवा ₹25-50 लाख की छोटी राशि में अपनी इनोवेटिव आइडिया विदेशी कंपनियों को बेच देते हैं, जिससे भारत को नुकसान होता है। उन्होंने यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स और उद्योगों से स्वदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए एक फंड बनाने की अपील की।

डिलीवरी जॉब्स बनाम इनोवेशन

गोयल ने यह भी कहा कि भारत में हर साल लाखों STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथमेटिक्स) ग्रेजुएट्स पास होते हैं, लेकिन अधिकतर डिलीवरी बॉय और गर्ल्स बनने के लिए मजबूर हैं। उन्होंने पीएम मोदी द्वारा दिए गए नारे “जय अनुसंधान” को दोहराते हुए इनोवेशन को प्राथमिकता देने की बात कही।

सट्टेबाजी एप्स और चीन की ग्लोबल कंपनियां

मंत्री ने भारत में बढ़ती ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुआ खेलने वाली एप्स पर भी सवाल उठाए, जिनसे लोगों में लत बढ़ रही है, लेकिन इससे वास्तविक आर्थिक उत्पादकता नहीं हो रही। इसके विपरीत, चीन Shein, DJI, और Alibaba जैसी कंपनियों को खड़ा कर वैश्विक व्यापार पर नियंत्रण कर रहा है।

निष्कर्ष

गोयल का यह बयान भारतीय स्टार्टअप्स के लिए एक वास्तविकता जांच की तरह है। यदि भारत को टेक्नोलॉजी और इनोवेशन में चीन का मुकाबला करना है, तो उसे गहरी तकनीकी रिसर्च, घरेलू निवेश और ग्लोबल मार्केट को ध्यान में रखते हुए नवाचार करने की जरूरत है।

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