रिपोर्ट: संजीव कुमार शर्मा
Bhagalpur बिहार के भागलपुर जिले के नवगछिया अनुमंडलीय अस्पताल से संवेदनहीनता और घोर लापरवाही का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था को शर्मसार कर दिया है। जहाँ एक तरफ सड़क हादसे में घायल छह लोग अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे थे, वहीं ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर अस्पताल परिसर में क्रिकेट खेलने में मशगूल थे।

Bhagalpur तड़पते मरीज और मैदान में डॉक्टर
जानकारी के अनुसार, एक भीषण सड़क दुर्घटना के बाद स्थानीय लोगों द्वारा छह घायलों को आनन-फानन में नवगछिया अनुमंडलीय अस्पताल लाया गया। इनमें से पांच की हालत बेहद नाजुक थी और उन्हें तत्काल डॉक्टर के हस्तक्षेप की जरूरत थी। आरोप है कि उस समय इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात डॉ. अफजल हुसैन वार्ड में मौजूद रहने के बजाय अस्पताल परिसर में बच्चों के साथ क्रिकेट खेल रहे थे।

Bhagalpur वीडियो वायरल: दांव पर लगी पांच जानें
घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें घायल अस्पताल के फर्श और बेड पर तड़पते नजर आ रहे हैं, जबकि डॉक्टर साहब हाथ में बल्ला थामे दिखाई दे रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि डॉक्टर ने घायलों को प्राथमिक उपचार देने की जिम्मेदारी अन्य चतुर्थ वर्गीय स्टाफ पर छोड़ दी और स्वयं खेल में व्यस्त रहे। स्थानीय लोगों ने जब इस पर आपत्ति जताई, तब जाकर स्थिति संभली, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।

Bhagalpur पुराना है लापरवाही का इतिहास: दलालों का बोलबाला
अस्पताल की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल नए नहीं हैं। स्थानीय नागरिकों ने गंभीर आरोप लगाए हैं:
- उदासीन रवैया: डॉ. अफजल हुसैन पर पहले भी ड्यूटी के दौरान अनुपस्थित रहने और मरीजों के प्रति असंवेदनशील व्यवहार के आरोप लग चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक कार्रवाई के अभाव में उनके हौसले बुलंद हैं।
- रेफरल का खेल: आरोप है कि यहाँ गंभीर मरीजों का इलाज करने के बजाय “सुविधा नहीं है” का बहाना बनाकर तुरंत रेफर कर दिया जाता है।
- दलालों की सक्रियता: अस्पताल परिसर के बाहर सक्रिय दलाल कथित रूप से मरीजों को गुमराह कर निजी क्लीनिकों में ले जाते हैं, जिसमें अस्पताल कर्मियों की मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।
Bhagalpur कार्रवाई की मांग
इस शर्मनाक घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। नागरिकों ने स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों और जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी डॉक्टर के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि अगर सरकारी अस्पतालों में जीवन रक्षक ही खेल में व्यस्त रहेंगे, तो आम जनता का भरोसा इस व्यवस्था से पूरी तरह उठ जाएगा।
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