Kolkata बंगाल में ढहा ममता का ‘किला’: 15 साल बाद सत्ता से बाहर हुई TMC, जानिए वे 5 बड़े कारण जिससे चला बीजेपी का ‘खेला’

- Advertisement -
Swadesh NewsAd image
Kolkata

Kolkata पश्चिम बंगाल की सियासत में आज एक युग का अंत होता नजर आ रहा है। विधानसभा चुनाव के रुझानों ने साफ कर दिया है कि सूबे में ‘मां, माटी और मानुष’ का नारा देने वाली ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) की विदाई तय है। 15 साल के शासन के बाद बंगाल में बीजेपी की आंधी ने टीएमसी को सत्ता से बेदखल कर दिया है। कोलकाता में बीजेपी मुख्यालय के बाहर जश्न का माहौल है, ‘जय श्री राम’ के नारे गूंज रहे हैं और शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में पार्टी ऐतिहासिक जीत की ओर अग्रसर है।

आइए विश्लेषण करते हैं उन 5 प्रमुख कारणों का, जिसकी वजह से ममता बनर्जी का करिश्मा इस बार काम नहीं आया:

Kolkata कानून-व्यवस्था और ‘आरजी कर’ कांड का गुस्सा

राज्य में गिरती कानून-व्यवस्था ममता सरकार के लिए सबसे बड़ी कमजोरी साबित हुई। विशेष रूप से आरजी कर मेडिकल कॉलेज में हुई वीभत्स घटना (रेप-मर्डर) के बाद जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया था। चुनावी हिंसा और स्थानीय स्तर पर बढ़ते अपराधों ने मतदाताओं के मन में असुरक्षा की भावना पैदा की। बीजेपी ने इसे प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया और जनता को यह समझाने में सफल रही कि टीएमसी शासन में महिलाएं और आम नागरिक सुरक्षित नहीं हैं।

Kolkata भ्रष्टाचार और ‘सिंडिकेट राज’ की नाराजगी

सरकारी नौकरियों में भर्ती घोटाला और राशन घोटाले जैसे भ्रष्टाचार के आरोपों ने टीएमसी की छवि को बुरी तरह प्रभावित किया। अमित शाह और नरेंद्र मोदी ने अपनी रैलियों में बार-बार ‘सिंडिकेट राज’ का जिक्र किया। युवाओं में बेरोजगारी और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी के कारण भारी असंतोष था। जनता ने भ्रष्टाचार के इन आरोपों को गंभीरता से लिया, जिसका असर सीधे ईवीएम पर पड़ा।

Kolkata घुसपैठ और राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा

सीमावर्ती इलाकों में घुसपैठ का मुद्दा बीजेपी की जीत की बड़ी वजह बना। बीजेपी ने टीएमसी पर घुसपैठियों के प्रति नरम रुख अपनाने का आरोप लगाया। प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री शाह का यह वादा कि “बीजेपी सरकार बनते ही घुसपैठियों को बाहर फेंका जाएगा”, सीमावर्ती जिलों के मतदाताओं को खूब भाया। टीएमसी इस मुद्दे पर बचाव की मुद्रा में रही और कोई ठोस जवाब नहीं दे सकी।

Kolkata तुष्टिकरण और ‘संदेशखाली’ का असर

बीजेपी शुरू से ही ममता सरकार पर मुस्लिम तुष्टिकरण का आरोप लगाती रही है। संदेशखाली जैसी घटनाओं ने इस आग में घी का काम किया, जहाँ शाहजहां शेख जैसे अपराधियों पर कार्रवाई में देरी को हिंदू मतदाताओं के ध्रुवीकरण से जोड़कर देखा गया। बीजेपी ने यह संदेश देने में कामयाबी हासिल की कि सरकार एक विशेष वर्ग को प्राथमिकता दे रही है, जिससे बहुसंख्यक वर्ग में नाराजगी बढ़ी।

Kolkata 15 साल की सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency)

किसी भी सरकार के लिए 15 साल तक सत्ता में बने रहने के बाद जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना मुश्किल होता है। बंगाल में इस बार ‘बदलाव की लहर’ स्पष्ट दिखी। लंबे समय से एक ही सत्ता के रहने से उत्पन्न ऊब और स्थानीय स्तर पर टीएमसी कार्यकर्ताओं की कार्यशैली से लोग नाराज थे। बीजेपी ने खुद को एक मजबूत और नए विकल्प के रूप में पेश किया, जिसे जनता ने स्वीकार कर लिया।

Read this: Satguru और आलिया भट्ट का नेपोटिज़्म पर बना वीडियो वायरल हुआ, X यूजर्स ने प्रतिक्रिया दी

Mahidpur: ‘लेडी सिंघम’ का बड़ा एक्शन, वन और राजस्व विभाग ने आरा मशीनों पर की छापेमारी

रिपोर्टर : कुशाल ठाकुर Mahidpur उज्जैन जिले के महिदपुर क्षेत्र में अवैध

Sandipani School : देशभर में मॉडल बनेंगे सांदीपनि स्कूल ,सांदीपनि स्कूलों से शिक्षा को नए आयाम

Sandipani School : गुणवत्तापूर्ण, रोजगारोन्मुखी शिक्षा पर जोर,केंद्रीय शिक्षा मंत्री से मुख्यमंत्री

Disneyland Fair Clash : कोरबा के डिजनीलैंड मेले में हंगामा, दंपत्ति से मारपीट का आरोप

Disneyland Fair Clash : टिकट विवाद के बाद झूला कर्मचारियों और दंपत्ति

Bhopal: CM डॉ. मोहन ने नए सीएम शुभेंदु को दी बधाई, कहा- आज से पश्चिम बंगाल में नवयुग का शुभारंभ

Bhopal: शुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के पहले मुख्यमंत्री

PWD Commission Controversy: करोड़ों के भुगतान, कमीशनखोरी और मारपीट का CCTV आया सामने

PWD Commission Controversy: 4.65 करोड़ के भुगतान पर विवाद, PWD कर्मचारी पर

Illegal Land Encroachment: सरगुजा में अवैध कब्जों पर प्रशासन सख्त, बिहार रिजॉर्ट की जमीन की फिर हुई जांच

Illegal Land Encroachment: कमोदा स्थित बिहार रिजॉर्ट पहुंचा प्रशासनिक अमला, सरकारी जमीन