रिपोर्ट: अजीत कुमार ठाकुर
Supaul बिहार के सुपौल जिले के छातापुर प्रखंड स्थित मदरसा हासिमिया में फर्जीवाड़े का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि सचिव और प्रधानाध्यापक के जाली हस्ताक्षर कर सेवानिवृत्त शिक्षकों के नाम पर लगभग एक करोड़ रुपये की राशि अवैध रूप से निकाल ली गई। इस घोटाले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन शिक्षकों के नाम पर पैसे निकाले गए, उनमें से कुछ की मृत्यु कई साल पहले ही हो चुकी है।
Supaul ऐसे हुआ बड़े घोटाले का खुलासा
यह मामला लक्ष्मीनियां पंचायत के बरमोतरा स्थित मदरसा हासिमिया का है। घोटाले की परतें तब खुलीं जब वर्तमान हेडमास्टर मो. अरशद और पूर्व हेडमास्टर सह वर्तमान सहायक शिक्षक मो. नाजिम अली के बीच विवाद हुआ। मामला बढ़ता देख मदरसा के सचिव मो. कासिम ने इसकी शिकायत प्रमंडलीय आयुक्त की जनसुनवाई में की।
Supaul मृतकों के खाते से भी हुई निकासी
सचिव मो. कासिम के अनुसार, मदरसा के पुराने अभिलेखों में हेरफेर कर एरियर भुगतान के नाम पर प्रति शिक्षक 15 से 20 लाख रुपये की निकासी की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक शिक्षक, जिनकी मृत्यु करीब 7 साल पहले हो चुकी है, उनके नाम पर भी सरकारी राशि का अंतरण कर बैंक खाते से पैसे निकाले गए। वर्तमान में मदरसे में केवल दो ही शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि बाकी सभी रिटायर हो चुके हैं।

Supaul जांच टीम ने खंगाले दस्तावेज
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी सावन कुमार के निर्देश पर जांच टीम गठित की गई। मंगलवार को डीपीओ स्थापना आलोक शेखर और बीईओ देश कुमार जांच के लिए मदरसे पहुंचे। अधिकारियों ने मौके पर मौजूद दस्तावेजों और हस्ताक्षरों का मिलान किया। प्रारंभिक जांच में हस्ताक्षरों में असमानता पाई गई है, जिसे लेकर विभाग अब पुराने बैंक अभिलेखों की पड़ताल कर रहा है।
Supaul प्रशासनिक रुख: दोषियों पर गिरेगी गाज
इस मामले पर जिला प्रशासन बेहद सख्त नजर आ रहा है। सुपौल के डीएम ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
“शिकायत के आधार पर जांच टीम भेजी गई है। रिपोर्ट प्राप्त होते ही दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।” — सावन कुमार, डीएम सुपौल
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