BY
Yoganand Shrivastava
Odisha आधुनिकता के इस दौर में भी जातिगत बंधन कितने मजबूत हैं, इसका ताजा उदाहरण ओडिशा के नबरंगपुर जिले में देखने को मिला है। यहाँ झरिगांव के पूर्व विधायक सदाशिव प्रधानि और उनके पूरे परिवार को उनके अपने ही ‘भतरा समाज’ ने जाति से बाहर कर दिया है। यह कठोर निर्णय पूर्व विधायक द्वारा अपनी बेटी का रिश्ता दूसरी जाति के युवक के साथ तय करने के विरोध में लिया गया है।
Odisha दंतेश्वरी मंदिर परिसर में हुआ फरमान जारी
जानकारी के अनुसार, झरिगांव ब्लॉक के धामनागुड़ा गांव स्थित दंतेश्वरी मंदिर परिसर में अखिल भारतीय भतरा विकास परिषद की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में जिले के 10 ब्लॉकों से समाज के प्रतिनिधि शामिल हुए। लंबे विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि सदाशिव प्रधानि ने समाज की परंपराओं का उल्लंघन किया है, इसलिए उन्हें और उनके परिवार को सामाजिक रूप से बहिष्कृत (Boycott) किया जाता है।
Odisha क्या है विवाद की मुख्य वजह?
विवाद की जड़ पूर्व विधायक की बेटी की सगाई है।
- अंतरजातीय विवाह: सदाशिव प्रधानि अपनी बेटी की शादी ब्राह्मण समाज के एक युवक से कर रहे हैं।
- समाज का तर्क: भतरा समाज के नेताओं का कहना है कि उनके समाज में इंटरकास्ट मैरिज (अंतरजातीय विवाह) की अनुमति नहीं है। इसे समाज की प्राचीन परंपराओं और नियमों के खिलाफ माना जाता है।
- सगाई और शादी: हाल ही में दोनों की सगाई हुई है और अगले महीने शादी होने की संभावना है, जिसे रोकने या विरोध करने के लिए समाज ने यह कदम उठाया है।
Odisha बहिष्कार का मतलब: सुख-दुख में कोई नहीं होगा शामिल
परिषद द्वारा जारी आधिकारिक पत्र में स्पष्ट किया गया है कि सामाजिक बहिष्कार की अवधि के दौरान भतरा समाज का कोई भी सदस्य प्रधानि परिवार के किसी भी कार्यक्रम, उत्सव या सुख-दुख में शामिल नहीं होगा। साथ ही, परिवार के साथ किसी भी प्रकार का सामाजिक संपर्क रखने पर भी पाबंदी लगाई गई है।
Odisha इतिहास खुद को दोहरा रहा है?
यह नबरंगपुर में अपनी तरह का पहला मामला नहीं है। इससे पहले पूर्व लोकसभा सांसद प्रदीप माझी को भी इसी तरह के आरोपों के चलते 12 वर्षों के लिए समाज से बहिष्कृत किया जा चुका है। फिलहाल, सदाशिव प्रधानि या उनके परिवार की ओर से इस तुगलकी फरमान पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।





