BY
Yoganand Shrivastava
Mumbai नवी मुंबई के वाशी इलाके से गिरफ्तार मोहम्मद तारिक पठान (निवासी रत्नागिरी) खुद को गृह मंत्री का निजी सचिव ‘पवन कुमार यादव’ बताकर अधिकारियों को फोन करता था। पुलिस के मुताबिक, आरोपी का मुख्य मकसद पुलिसिया मामलों में हस्तक्षेप कर आरोपियों को राहत दिलाना और इसके बदले उनसे पैसे ऐंठना था। क्राइम ब्रांच ने उसे एक होटल से तब दबोचा जब वह अपनी अगली चाल की योजना बना रहा था।
अधिकारियों को झांसे में लेने का शातिर तरीका
Mumbai आरोपी तारिक पठान बेहद शातिराना तरीके से तकनीकी हेरफेर करता था। वह अलग-अलग राज्यों से दूसरों के नाम पर जारी सिम कार्ड खरीदता था। विश्वास पैदा करने के लिए वह एक फोन में अपना नंबर ‘पीएस टू एमएचए’ (PS to MHA) के नाम से सेव रखता था और अधिकारियों को फोन कर खुद को प्रभावशाली व्यक्ति के रूप में पेश करता था। कभी एफआईआर दर्ज कराने तो कभी वारंट रोकने के लिए वह वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को सीधे निर्देश देने का साहस करता था।
दिल्ली पुलिस के अधिकारी को फोन करना पड़ा भारी
Mumbai जालसाज की पोल तब खुली जब उसने 1 मार्च को दिल्ली के कनॉट प्लेस थाने के एक अधिकारी को फोन किया। उक्त अधिकारी एक महिला को वारंट तामील कराने मुंबई के ग्रांट रोड आए थे। पठान ने गृह मंत्री का सहायक बनकर अधिकारी को फोन किया और महिला को परेशान न करने की हिदायत दी। अधिकारी को संदेह हुआ और मामले की जानकारी वरिष्ठों को दी गई, जिसके बाद मुंबई क्राइम ब्रांच ने जाल बिछाकर आरोपी को तकनीकी सर्विलांस के जरिए ट्रैक किया।
करोड़ों की ठगी और मोबाइल बदलने का खेल
Mumbai पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरफ्तारी से बचने के लिए पठान लगातार अपने मोबाइल हैंडसेट और सिम कार्ड बदलता रहता था। उसने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है और कितनी रकम वसूली है, इसका सटीक आकलन किया जा रहा है। आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। क्राइम ब्रांच अब इस बात की जांच कर रही है कि इस गिरोह में उसके साथ और कौन लोग शामिल हैं।
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