Nainital : सरोवर नगरी नैनीताल के मां नैना देवी मंदिर से आज कुमाऊं की खड़ी होली का भव्य आयोजन किया गया। यह पर्व कुमाऊं में चार सौ साल से ज्यादा पुरानी परंपरा के रूप में मनाया जाता है। ढोल की थाप और राग-रागिनियों के संग कदमों की चहल-कदमी इस होली को विशिष्ट बनाती है।
Nainital : ढोल की थाप और रागों के संग जश्न
खड़ी होली में राग दादरा और राग कहरवा में गीत गाए जाते हैं। गायन के दौरान कृष्ण-राधा, राजा हरिशचन्द्र, श्रवण कुमार के साथ रामायण और महाभारत काल की कथाओं का वर्णन किया जाता है। इस पर्व में सिर्फ रंगों और संगीत का आनंद ही नहीं, बल्कि कुमाऊं की गौरवशाली सांस्कृतिक और सामाजिक शिक्षा का संदेश भी छिपा होता है।
Nainital : कुमाऊं की वादियों में फैलती परंपरा

खड़ी होली का आयोजन पहाड़ के विभिन्न जिलों में होता है, जिनमें चम्पावत, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, बागेश्वर और नैनीताल शामिल हैं। शिवरात्रि के बाद चीर बंधन के साथ शुरू होने वाली यह होली छलडी तक चलती है। मंदिर से शुरू होकर यह होली गांव-गांव में फैलती है और हर घर में जाकर आशीर्वाद भी देती है।
Nainital : नई पीढ़ी और भाईचारे का संदेश
चम्पावत के होल्यार देवेंद्र मनराल ने कहा कि चन्द्रशासन काल से चली आ रही यह परंपरा आज भी नजीर बनी हुई है और नई पीढ़ी भी इससे जुड़ रही है। आयोजक जाहूर आलम ने बताया कि इस होली का उद्देश्य सिर्फ उत्सव मनाना नहीं, बल्कि समाज को संदेश देना और भाईचारे को बढ़ावा देना भी है।
Nainital : पहाड़ों की अनोखी होली
कुमाऊं की खड़ी होली देशभर में खेली जाने वाली होली से अलग है। ढोल की थाप और राग-रागिनियों के संग होल्यार रंगों में रंगते हैं, और पर्व का दृश्य हर किसी को अपनी ओर खींचता है। यह परंपरा कुमाऊं की वादियों में सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बनी हुई है।
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