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Ujjain समय की गणना का वैश्विक केंद्र बनेगा उज्जैन: अब GMT नहीं, ‘महाकाल स्टैंडर्ड टाइम’ से पहचानेगी दुनिया

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Ujjain मध्यप्रदेश की धार्मिक राजधानी उज्जैन अब केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि वैश्विक काल गणना (Time Calculation) की धुरी बनने की ओर अग्रसर है। हाल ही में उज्जैन के तारामंडल परिसर में आयोजित ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में देश के दिग्गजों ने हुंकार भरी है कि जिस तरह कभी शून्य देशांतर रेखा उज्जैन से गुजरती थी, उसी गौरव को पुनः स्थापित कर ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) के स्थान पर ‘महाकाल स्टैंडर्ड टाइम’ (MST) को वैश्विक मानक बनाया जाए।

Ujjain मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस वैचारिक मंथन का शुभारंभ किया, जहाँ प्राचीन वैदिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के अद्भुत समन्वय पर जोर दिया गया।

Ujjain काल गणना की प्राचीन विरासत और आधुनिक विज्ञान का संगम

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि उज्जैन सदियों से खगोल शास्त्र और गणित का केंद्र रहा है। जब दुनिया समय को परिभाषित करना सीख रही थी, तब यहाँ के ऋषियों ने नक्षत्रों की सटीक गणना कर ली थी। प्राचीन भूगोल के अनुसार, उज्जैन पृथ्वी का मध्य बिंदु है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिव ही ‘महाकाल’ हैं—यानी वह बिंदु जहाँ से समय जन्म लेता है और जहाँ विलीन होता है। इसी वैज्ञानिक सत्य को पुनर्जीवित करने के लिए उज्जैन को अब ‘साइंस सिटी’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसी कड़ी में 15 करोड़ की लागत वाले अत्याधुनिक विज्ञान केंद्र का लोकार्पण भी किया गया।

Ujjain ‘महाकाल स्टैंडर्ड टाइम’ (MST): औपनिवेशिक विरासत को चुनौती

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एक महत्वपूर्ण विषय उठाते हुए कहा कि पश्चिमी तानाशाही व्यवस्था ने भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा को नुकसान पहुँचाया और काल गणना का केंद्र जबरन ग्रीनविच (यूरोप) को बना दिया। उन्होंने कहा कि समय केवल एक गणितीय अंक नहीं, बल्कि एक गहरी संवेदना है जिसकी सूक्ष्म व्याख्या भारतीय शास्त्रों में उपलब्ध है। सरकार अब ‘ज्ञान भारतम्’ योजना के माध्यम से उस छीनी गई विरासत को वापस लाएगी और डोंगला (उज्जैन) को पुनः शून्य देशांतर का दर्जा दिलाकर इसे ‘महाकाल स्टैंडर्ड टाइम’ के रूप में स्थापित करेगी।

Ujjain सिंहस्थ-2028 और भविष्य की विकास योजनाएं

आगामी सिंहस्थ कुंभ 2028 को ध्यान में रखते हुए उज्जैन के बुनियादी ढांचे को भी नया विस्तार दिया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान 701.86 करोड़ रुपये की लागत वाले 4-लेन बायपास का भूमिपूजन किया गया। इसके अतिरिक्त, सम्राट विक्रमादित्य हेरिटेज इकाई के विस्तार और ‘विद्यार्थी विज्ञान मंथन 2026-27’ की वेबसाइट का भी शुभारंभ हुआ। विशेषज्ञों, जिनमें नीति आयोग के सदस्य वी.के. सारस्वत भी शामिल थे, ने जोर दिया कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए युवाओं को अपनी वैदिक जड़ों से जुड़कर आधुनिक एआई (AI) और स्पेस टेक्नोलॉजी में नवाचार करना होगा।

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