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The Vvaan Movie Review : सिद्धार्थ-तमन्ना की जोड़ी ने जीता दिल, रहस्य और आस्था के बीच उलझी कहानी

The Vvaan Movie Review

by: vijay yadav

The Vvaan Movie Review : सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की फिल्म ‘द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ 25 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। फिल्म का निर्देशन दीपक कुमार मिश्रा ने किया है। फिल्म में सुनील ग्रोवर, श्वेता तिवारी, अनूप सोनी और मनीष पॉल भी अहम भूमिकाओं में नजर आते हैं। फैंटेसी और थ्रिलर के साथ फिल्म लोककथा, आस्था, प्रकृति और इंसानी लालच को कहानी का आधार बनाती है।

कलाकार: सिद्धार्थ मल्होत्रा, तमन्ना भाटिया, सुनील ग्रोवर, श्वेता तिवारी, अनूप सोनी, मनीष पॉल
निर्देशक: दीपक कुमार मिश्रा
शैली: फैंटेसी, थ्रिलर
अवधि: 2 घंटे 17 मिनट

The Vvaan Movie Review : क्या है ‘द वन’ की कहानी?

फिल्म की कहानी ऋषि और ममता नाम के शादीशुदा जोड़े के इर्द-गिर्द घूमती है। दोनों मुंबई में रहते हैं और लंबे समय से परिवार बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी सिलसिले में वे छठ पूजा के दौरान अपने पुश्तैनी गांव पहुंचते हैं। गांव का माहौल शहर से बिल्कुल अलग है और यहां आज भी जंगल तथा उससे जुड़ी पुरानी मान्यताओं का गहरा प्रभाव देखने को मिलता है।

गांव के जंगल में शाम के बाद जाने की मनाही है। स्थानीय लोगों के लिए यह केवल एक परंपरा नहीं बल्कि आस्था और डर से जुड़ा विषय है। ऋषि इन मान्यताओं को अंधविश्वास की नजर से देखता है और इस नियम को गंभीरता से नहीं लेता।

The Vvaan Movie Review

कहानी तब नया मोड़ लेती है, जब जंगल के आसपास विकास और निर्माण की कोशिश शुरू होती है। ऋषि का परिचित दीपक बेहतर कनेक्टिविटी के लिए जंगल के हिस्से को काटकर रास्ता बनाने की योजना पर काम करता है। वहीं गांव के लोग जंगल को पवित्र मानते हुए इसका विरोध करते हैं।

इसी बीच ऋषि अपनी जंगल से लगी जमीन को बेचने के बारे में सोचता है। विकास, जमीन, प्रकृति और सदियों पुरानी मान्यताओं के बीच टकराव बढ़ता जाता है। जब ऋषि सूर्यास्त के बाद जंगल में पहुंचता है तो उसके सामने ऐसे रहस्य आने लगते हैं, जिनका जवाब उसके तर्क और समझ से बाहर है।

The Vvaan Movie Review : फर्स्ट हाफ में बनता है माहौल, सेकंड हाफ में कमजोर पड़ती पकड़

फिल्म की शुरुआत धीरे-धीरे अपने किरदारों और वातावरण को स्थापित करती है। गांव, जंगल और वहां प्रचलित मान्यताओं को कहानी में जगह दी गई है। फिल्म का पहला हिस्सा दर्शक के मन में यह सवाल पैदा करता है कि आखिर जंगल में सूर्यास्त के बाद जाने से इतना डर क्यों है?

कहानी जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, रहस्य गहराता जाता है। हालांकि दूसरे हिस्से में पटकथा कई जगह अपनी गति और एकरूपता बनाए नहीं रख पाती। कई घटनाएं अलग-अलग हिस्सों में बंटी हुई महसूस होती हैं और कुछ रहस्यों का खुलासा उतना प्रभाव नहीं पैदा करता, जितनी उम्मीद शुरुआत में बनती है।

फिल्म का एक दिलचस्प पक्ष यह है कि निर्देशक ने आस्था और अंधविश्वास के अलावा इंसानी लालच को भी कहानी में जोड़ा है। जंगल और जमीन को लेकर होने वाला संघर्ष केवल परंपरा बनाम आधुनिकता तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसके पीछे छिपे स्वार्थ को भी सामने लाता है।

The Vvaan Movie Review : सिनेमैटोग्राफी और VFX कैसे हैं?

जंगल के रहस्यमयी वातावरण को कैमरे के जरिए अच्छी तरह उभारने की कोशिश की गई है। अंधेरा, जंगल और उससे जुड़े रहस्यमयी दृश्य फिल्म के माहौल को मजबूत करते हैं। कुछ VFX सीक्वेंस भी प्रभाव पैदा करते हैं, खासकर जब कहानी में रहस्यमयी जानवरों और अलौकिक शक्तियों का प्रवेश होता है।

हालांकि, कुछ जगह सेट और विजुअल ट्रीटमेंट को और बेहतर किया जा सकता था। छठ पूजा से जुड़े हिस्से को भी कहानी में अपेक्षाकृत कम जगह मिली है।

The Vvaan Movie Review : सिद्धार्थ-तमन्ना की केमिस्ट्री बनी फिल्म की ताकत

अभिनय की बात करें तो सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की जोड़ी फिल्म में अच्छी नजर आती है। दोनों के बीच की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री कहानी के भावनात्मक हिस्से को संभालती है।

सिद्धार्थ ने ऐसे युवक का किरदार निभाया है जो शुरुआत में तर्क और व्यावहारिक सोच पर भरोसा करता है, लेकिन घटनाओं के साथ उसकी सोच में बदलाव आता है। तमन्ना ने ममता के किरदार में भावनात्मक पक्ष को मजबूती दी है।

सुनील ग्रोवर ने नकारात्मक किरदार में अपनी अलग छाप छोड़ी है। अनूप सोनी और श्वेता तिवारी ने भी अपनी भूमिकाओं को सहजता से निभाया है। वहीं मनीष पॉल का किरदार कहानी में हल्के-फुल्के हास्य के मौके देता है।

The Vvaan Movie Review : क्लाइमैक्स छोड़ता है कुछ सवाल

फिल्म का सबसे कमजोर हिस्सा इसका अंतिम भाग कहा जा सकता है। कहानी जिन रहस्यों को लेकर उत्सुकता पैदा करती है, उनके जवाब मिलने के बाद भी क्लाइमैक्स अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ पाता। देवी से जुड़ी कहानी और उसके पीछे की घटनाओं को और बेहतर तरीके से कहानी में पिरोया जा सकता था।

फिल्म में विचार और विषय दोनों दिलचस्प हैं। लोककथा, आस्था, प्रकृति और इंसानी लालच का मेल इसे सामान्य हॉरर-कॉमेडी से अलग दिशा देता है। लेकिन पटकथा की असमान गति और क्लाइमैक्स की कमजोरी के कारण फिल्म अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुंच पाती।

कुल मिलाकर, ‘द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ में रहस्य, फैंटेसी और लोकविश्वास का दिलचस्प मिश्रण देखने को मिलता है। सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की जोड़ी फिल्म का मजबूत पक्ष है, जबकि कहानी का दूसरा हिस्सा और क्लाइमैक्स कुछ दर्शकों को अपेक्षाकृत कमजोर लग सकता है।
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