Food Adulteration : बेरोक-टोक फल-फूल रहा मिलावट का बाजार,मिलावटखोरों पर कब प्रहार करेगी सरकार ?
Food Adulteration : भारत जैसे देश में पनीर हर किसी का पसंदीदा है…लेकिन आज के वक्त में लोग इसी पनीर से मुंह फेर रहे हैं….क्योंकि बाजार में मिलावटी पनीर की भरमार है…जो सेहत के लिए खतरनाक है….इतना ही नही खाद्य पदार्थों में मिलावट एक गंभीर वैश्विक समस्या है जो आज हमारे समाज की सेहत और अर्थव्यवस्था दोनों को खोखला कर रही है..ज्यादा मुनाफा कमाने के लालच में कुछ चंद व्यापारियों शुद्ध खाद्य सामग्रियों में घटिया, सस्ती और हानिकारक चीजें मिला रहे हैं…जो न केवल भोजन के पोषक तत्वों को नष्ट करता है, बल्कि हमारी जिंदगी में एक धीमा जहर साबित हो रही है…और लोग कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं से भी जूझ रहे हैं…केंद्र और राज्य सरकारों के तमाम दावों के बावजूद मुनाफा कमाने के इस अवैध कारोबार पर अंकुश नहीं लग पा रहा है..भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के मुताबिक 2025-2026 में देश भर में 5 लाख से ज्यादा खाद्य प्रतिष्ठानों के निरीक्षण के बाद दो लाख से ज्यादा नमूने लिए गए थे..इनमें से चालीस हजार नमूने गैर-मानक पाए गए…जिनमें सबसे ज्यादा बीस हजार नमूने उत्तर प्रदेश के थे..
Food Adulteration : हालांकि देश के अन्य राज्यों में भी हालात ठीक नहीं है..जो मामले दर्ज होते हैं, उनमें भी दोषियों को सजा मिलने की दर अगर बेहद कम रहती है..जाहिर है कि संबंधित महकमे के कर्मचारियों की साठगांठ से अक्सर मिलावट करने वाले बच निकलते हैं…यही वजह है कि इस अवैध कारोबार में शामिल लोगों को कानून का कोई खौफ नहीं है..और मिलावटी वस्तुओं का बाजार बेरोक-टोक फल-फूल रहा है.. हालाकि FSSAI ने एनालॉग पनीर की बिक्री और लेबलिंग को लेकर सख्त नियमों का प्रस्ताव रखा है..जिसमें दूध से मिली सामग्री के बजाय गैर-डेयरी सामग्री से बने उत्पादों की पहचान उनके असल नाम से बतानी होगी…ऐसे उत्पादों के नाम, लेबल, पैकेजिंग और मार्केटिंग में ‘पनीर’ शब्द के इस्तेमाल पर रोक लगाई जा सकती है..वनस्पति तेल, स्टार्च या दूसरी वैकल्पिक सामग्री से बने उत्पादों को असली डेयरी पनीर से अलग तरीके से पेश करना होगा… ऐसे में सरकार को चाहिए कि खाद्य पदार्थों की निगरानी और जांच का जिम्मा संभालने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और मिलावटखोरों को संरक्षण देने वालों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाए…इसके अलावा आम लोगों को भी मिलावटी पदार्थों के प्रति व्यापक स्तर पर जागरूक किए जाने की जरूरत है..
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