महिला के रोने मात्र से दहेज उत्पीड़न साबित नहीं होता’ – दिल्ली हाई कोर्ट की अहम टिप्पणी

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BY: Yoganand Shrivastava

नई दिल्ली, दिल्ली हाई कोर्ट ने दहेज उत्पीड़न से जुड़े एक मामले में अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि केवल इस आधार पर कि महिला रो रही थी, इसे दहेज उत्पीड़न या क्रूरता का मामला नहीं माना जा सकता।

मामला क्या है?

यह केस दिसंबर 2010 में हुई एक शादी से जुड़ा है। महिला के परिजनों का आरोप था कि विवाह के बाद पति और ससुरालवालों ने लगातार उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया। उनका कहना था कि शादी में करीब चार लाख रुपये खर्च करने के बावजूद पति पक्ष ने मोटरसाइकिल, नकदी और सोने के कंगन की मांग की। इस बीच, महिला की दो बेटियां भी हुईं और मार्च 2014 में उसकी मृत्यु हो गई।

बहन का बयान और कोर्ट की प्रतिक्रिया

मृतका की बहन ने अपने बयान में कहा था कि होली पर जब उसने फोन किया, तो उसकी बहन रो रही थी। इस पर हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल रोने की घटना से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि वह दहेज उत्पीड़न का शिकार थी।

मौत का कारण ‘निमोनिया’

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में महिला की मौत का कारण निमोनिया बताया गया। निचली अदालत ने भी यही आधार मानते हुए पति और ससुरालवालों को आरोपों से मुक्त कर दिया था। हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी।

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