Transfer Syndicate in MP: ₹50 लाख के गबन के आरोपी को 5 महीने में ही मिला ‘इनाम’, कृषि विभाग में नियमों को ताक पर रख दोबारा दी मनचाही पोस्टिंग

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₹58.50 lakh scam in the Bhind Agriculture Department

Report: Alok Bharadwaj

Transfer Syndicate in MP जिसके खिलाफ खुद प्रमुख सचिव ने दिए थे FIR के निर्देश, OSD ने उसी दागी को उसी जिले में भेजा

मध्य प्रदेश के किसान कल्याण तथा कृषि विभाग में एक ऐसा प्रशासनिक अजूबा सामने आया है जिसने राज्य की पूरी तबादला नीति और जीरो टॉलरेंस के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। मामला एक रसूखदार अधिकारी से जुड़ा है, जिसके खिलाफ महज पाँच महीने पहले विभाग के प्रमुख सचिव ने ₹50 लाख के बड़े गबन (Embezzlement) का दोषी पाते हुए तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने का लिखित आदेश दिया था। लेकिन कानून के फंदे से बचने के बजाय, विभाग के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (OSD) की मेहरबानी से उस दागी अफसर को नियमों को ठेंगा दिखाकर दोबारा उसी जिले में मलाईदार पद पर स्थानांतरित कर दिया गया है।

Transfer Syndicate in MP मिट्टी परीक्षण लैब और ‘आत्मा’ परियोजना में ₹50 लाख की भारी वित्तीय जालसाजी

भ्रष्टाचार का यह पूरा खेल सरकारी योजनाओं के बजट को ठिकाने लगाने से जुड़ा है। जांच के मुताबिक, मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला के तत्कालीन प्रभारी संजीव चतुर्वेदी और उपसंचालक रामसुजान शर्मा पर केमिकल (रसायन) और लैब की अन्य जरूरी सामग्रियों की सरकारी खरीद में व्यापक स्तर पर हेरफेर करने का गंभीर आरोप है। इसके अतिरिक्त, किसानों के विकास के लिए चलाई जाने वाली ‘आत्मा’ (ATMA) परियोजना के तहत भी प्रशिक्षण शिविरों और कृषि उपकरणों की नकली खरीदी दिखाकर सरकारी खजाने को पूरे ₹50 लाख का चूना लगाया गया। इसी बड़े वित्तीय घोटाले की पुष्टि होने के बाद शीर्ष स्तर से एफआईआर के कड़े निर्देश जारी हुए थे।

Transfer Syndicate in MP बीजेपी के वरिष्ठ नेता को भी नहीं दी जानकारी, विभागीय जांच की आड़ में रफा-दफा हुआ मामला

इस ₹50 लाख के घोटाले की गूंज जब सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के ही एक वरिष्ठ नेता तक पहुँची, तो उन्होंने आधिकारिक तौर पर विभाग से इसके दस्तावेज और विवरण मांगे थे। लेकिन विभाग के भीतर बैठे भ्रष्टाचार के संरक्षकों ने ‘विभागीय जांच’ चलने का तकनीकी बहाना बनाकर सत्ता पक्ष के नेता को भी जानकारी देने से साफ मना कर दिया। अब जांच पूरी होने या कार्रवाई होने से पहले ही, आरोपी अधिकारी की उसी क्षेत्र में वापसी ने साफ कर दिया है कि विभाग के भीतर एक बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है जो फाइलों को दबाने और अपने चहेते भ्रष्ट अफसरों को संरक्षण देने में जुटा है।

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