PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को नई दिल्ली स्थित अपने सरकारी आवास पर केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ तीसरी उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी, सुरक्षा, विदेश नीति और सुशासन से जुड़े क्षेत्रों में सरकार के आगामी कामकाज और प्राथमिकताओं पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से तत्काल समस्याओं से आगे बढ़कर देश की दीर्घकालिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नीतियां और योजनाएं तैयार करने पर जोर दिया।
PM Modi: भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर काम करें अधिकारी
प्रधानमंत्री ने सचिवों से कहा कि सरकारी कामकाज केवल रोजाना सामने आने वाली चुनौतियों और आंकड़ों तक सीमित नहीं होना चाहिए। अधिकारियों को देश के अगले कई वर्षों की जरूरतों और विकास की दिशा को ध्यान में रखकर योजनाओं पर काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत को विकसित और मजबूत अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे ले जाने के लिए दीर्घकालिक सोच जरूरी है। इसके लिए नीतियों में निरंतरता, बेहतर क्रियान्वयन और विभिन्न विभागों के बीच प्रभावी तालमेल को प्राथमिकता देनी होगी।
PM Modi: विभागों के बीच साइलो खत्म करने पर जोर
बैठक में प्रधानमंत्री ने अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों के बीच काम करने की शैली में मौजूद साइलो यानी सीमित दायरे में काम करने की प्रवृत्ति को बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ी समस्या नहीं है, बल्कि कार्य संस्कृति और सोच से भी इसका संबंध है।
पीएम मोदी ने अधिकारियों से अपनी जिम्मेदारियों का पूरा स्वामित्व लेने और सरकार के व्यापक उद्देश्य को ध्यान में रखकर काम करने की अपील की। उन्होंने टीम भावना और विभागों के बीच सहयोग को और मजबूत करने की आवश्यकता बताई।
PM Modi: कोविड और पश्चिम एशिया संकट का दिया उदाहरण
प्रधानमंत्री ने कोविड-19 महामारी और पश्चिम एशिया से जुड़े संकट के दौरान केंद्र सरकार के अलग-अलग विभागों के बीच हुए समन्वय का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में मंत्रालयों ने एक-दूसरे के साथ मिलकर तेजी से फैसले लिए और काम किया।
उन्होंने इस तरह के समन्वित कामकाज को केवल संकट के समय तक सीमित रखने के बजाय सामान्य सरकारी कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाने पर जोर दिया। उनके मुताबिक, बेहतर तालमेल से नीतियों के क्रियान्वयन की गति और परिणाम दोनों बेहतर किए जा सकते हैं।
PM Modi: AI के इस्तेमाल के साथ मानवीय विशेषज्ञता भी जरूरी
बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के बढ़ते इस्तेमाल पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने सरकारी कामकाज में AI की क्षमता का प्रभावी तरीके से इस्तेमाल करने की बात कही, लेकिन साथ ही मानवीय हस्तक्षेप और निर्णय लेने की क्षमता को बनाए रखने की जरूरत भी बताई।
उन्होंने AI और मानव विशेषज्ञता को साथ जोड़कर नए समाधान विकसित करने पर जोर दिया। उनका कहना था कि तकनीक का इस्तेमाल प्रशासन को अधिक प्रभावी और तेज बनाने के लिए किया जाना चाहिए, लेकिन महत्वपूर्ण निर्णयों में मानवीय समझ और जिम्मेदारी की भूमिका बनी रहनी चाहिए।
PM Modi: डेटा को राष्ट्रीय संपत्ति की तरह इस्तेमाल करने की जरूरत
प्रधानमंत्री ने डेटा को देश की महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संपत्ति और भविष्य के लिए अहम संसाधन बताया। उन्होंने कहा कि सरकार डेटा जुटाने, सुरक्षित रखने और उसके प्रबंधन पर बड़ी मात्रा में संसाधन खर्च करती है, लेकिन अलग-अलग विभागों में डेटा के बंटे होने से उसकी पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं हो पाता।
उन्होंने विभिन्न सरकारी प्रणालियों के बीच डेटा इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाने और जरूरत के मुताबिक विभागों के बीच डेटा साझा करने की व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया। इससे सरकारी योजनाओं की निगरानी, नीति निर्माण और सेवा वितरण को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
PM Modi: युवाओं और विश्वविद्यालयों से बढ़ेगा सरकार का संवाद
बैठक में प्रधानमंत्री ने युवाओं के साथ सरकार के संवाद को और मजबूत करने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि नीति निर्माण की प्रक्रिया में नए विचारों और नए दृष्टिकोण को शामिल करना जरूरी है।
प्रधानमंत्री ने सरकारी विभागों, विश्वविद्यालयों और युवाओं के बीच संवाद बढ़ाने की बात कही। उन्होंने माना कि शिक्षण संस्थानों और युवा वर्ग की भागीदारी से कई ऐसे नए और अपरंपरागत विचार सामने आ सकते हैं, जो भविष्य की नीतियों और योजनाओं को अधिक प्रभावी बना सकते हैं।
PM Modi: रक्षा क्षेत्र में रिसर्च और इनोवेशन पर जोर
रक्षा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री ने अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने की जरूरत बताई। उन्होंने भारतीय रक्षा उद्योग को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में लगातार काम करने पर जोर दिया।
इसके लिए रक्षा शिक्षा, तकनीकी क्षमता और मानव संसाधन विकास को मजबूत करने की आवश्यकता बताई गई। प्रधानमंत्री ने रक्षा क्षेत्र में नई तकनीकों और स्वदेशी क्षमता के विकास को भविष्य की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने पर जोर दिया।
PM Modi: जहाज निर्माण को मिशन मोड में आगे बढ़ाने की तैयारी
समुद्री क्षेत्र को लेकर हुई चर्चा में जहाज निर्माण और बंदरगाहों के विकास पर भी प्रधानमंत्री ने महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जहाज निर्माण को पहले ही बुनियादी ढांचे का दर्जा दिया जा चुका है और अब इसकी प्रगति की नियमित समीक्षा मिशन मोड में की जानी चाहिए।
प्रधानमंत्री ने केवल बंदरगाहों के विकास तक सीमित रहने के बजाय पोर्ट-लेड डेवलपमेंट को बढ़ावा देने की जरूरत बताई। इसका उद्देश्य बंदरगाहों के आसपास आर्थिक गतिविधियों, उद्योग और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को बेहतर तरीके से विकसित करना है।
PM Modi: विनिर्माण और निर्यात को बेहतर कनेक्टिविटी से जोड़ने पर जोर
बैठक में विनिर्माण इकाइयों और निर्यात केंद्रित उद्योगों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी की जरूरत पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की बढ़ती विनिर्माण क्षमता को मजबूत परिवहन और समुद्री बुनियादी ढांचे से जोड़ना जरूरी है।
बेहतर कनेक्टिविटी से उद्योगों को बंदरगाहों तक माल पहुंचाने में आसानी होगी और निर्यात प्रक्रिया अधिक प्रभावी बन सकती है। इससे देश की लॉजिस्टिक्स क्षमता और वैश्विक व्यापार में प्रतिस्पर्धा को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
PM Modi: वरिष्ठ अधिकारियों को टीम भावना मजबूत करने का संदेश
बैठक के अंत में प्रधानमंत्री ने पूरे सरकारी तंत्र में सामूहिक जिम्मेदारी, नवाचार और बेहतर टीमवर्क को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से कनिष्ठ अधिकारियों के साथ अधिक अनौपचारिक संवाद करने की अपील की।
उन्होंने अलग-अलग कैडर और विभागों के अधिकारियों के बीच मजबूत नेटवर्क विकसित करने की जरूरत भी बताई। प्रधानमंत्री का जोर इस बात पर रहा कि केंद्र सरकार के विभिन्न हिस्से अलग-अलग तरीके से काम करने के बजाय साझा लक्ष्य के साथ एक टीम के रूप में आगे बढ़ें।
PM Modi: बुनियादी ढांचे से सुशासन तक व्यापक एजेंडे पर चर्चा
प्रधानमंत्री की सचिवों के साथ हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी से लेकर सुरक्षा, विदेश मामले, डेटा, AI, रक्षा अनुसंधान, युवाओं की भागीदारी और समुद्री विकास जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर मंथन हुआ।
बैठक से स्पष्ट है कि सरकार आने वाले समय में प्रशासनिक समन्वय, तकनीक के इस्तेमाल, युवाओं की भागीदारी और दीर्घकालिक विकास रणनीति पर विशेष ध्यान देना चाहती है। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को मौजूदा चुनौतियों के साथ-साथ भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखकर काम करने का संदेश दिया।




