Supreme Court gets tough: एक ही मामले से 4 जजों के हटने पर भड़के CJI सूर्यकांत, वकीलों को चेतावनी– ‘न चलाएं चाल, भुगतने होंगे गंभीर परिणाम’

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Supreme Court gets tough

Supreme Court gets tough न्यायिक अधिकारी की बर्खास्तगी का मामला, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के 4 जजों ने खुद को किया अलग

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय (High Court) में एक अनोखा और हैरान करने वाला कानूनी गतिरोध सामने आया है, जहाँ एक बर्खास्त न्यायिक अधिकारी अमरीश कुमार जैन द्वारा साल 2022 में दायर की गई याचिका पर सुनवाई करने से 4 जजों ने खुद को अलग (Recuse) कर लिया है। खुद को अलग करने वाले न्यायाधीशों में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश शील नागू, जस्टिस लिसा गिल (2 सितंबर 2024), जस्टिस अश्वनी मिश्रा (25 मार्च 2025) और जस्टिस दीपक सिबल (14 मई) शामिल हैं। किसी भी जज द्वारा इस मामले को न सुने जाने से परेशान होकर याचिकाकर्ता ने अनुच्छेद 142 के तहत इस केस को दिल्ली हाईकोर्ट ट्रांसफर करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

Supreme Court gets tough ‘तथाकथित वरिष्ठ वकील मचा रहे हंगामा’ – सीजेआई ने लगाई फटकार, दिए रोजाना सुनवाई के आदेश

Supreme Court gets tough इस मामले पर सुनवाई करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया। सीजेआई सूर्यकांत ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को एक विशेष दो जजों की डिवीजन बेंच गठित करने का सख्त निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि यह नई बेंच आगामी 13 जुलाई से इस मामले की रोजाना (डे-टू-डे) सुनवाई करेगी और फैसला सुरक्षित होने तक इसे जारी रखेगी। मुख्य न्यायाधीश ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि कुछ “तथाकथित वरिष्ठ वकील” हाईकोर्ट में माहौल खराब कर रहे हैं। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यदि भविष्य में किसी वकील या याचिकाकर्ता ने जजों को केस से हटने के लिए मजबूर करने की कोई चाल चली, तो उसके खिलाफ दंडात्मक और गंभीर कार्रवाई की जाएगी।

Supreme Court gets tough जजों के केस छोड़ने का पुराना ट्रेंड; संजीव चतुर्वेदी और अतीक अहमद के मामलों का भी जिक्र

अदालतों में संवेदनशील या हाई-प्रोफाइल मामलों से न्यायाधीशों के अलग होने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले देश के चर्चित आईएफएस (IFS) अधिकारी संजीव चतुर्वेदी की अवमानना याचिका से भी अलग-अलग समय पर कुल 16 जज बिना कोई स्पष्ट कारण बताए सुनवाई से पीछे हट चुके हैं। इनमें 8 अक्टूबर 2025 को जस्टिस वर्मा मामले से अलग होने वाले 16वें न्यायाधीश बने थे। इसी तरह, माफिया अतीक अहमद से जुड़े मुकदमों की सुनवाई करने से भी अतीत में इलाहाबाद हाईकोर्ट के 10 जजों ने खुद को अलग कर लिया था। अब अमरीश जैन के मामले में भी ऐसा ही पैटर्न दिखने के बाद सुप्रीम कोर्ट को न्यायिक व्यवस्था की साख बचाने के लिए खुद कड़ा हस्तक्षेप करना पड़ा है।

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