SC ST Creamy Layer : SC-ST आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू नहीं– केंद्र क्रीमी लेयर सिद्धांत सिर्फ OBC, SEBC पर लागू
SC ST Creamy Layer : केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर स्पष्ट किया है कि SC-ST के आरक्षण में ‘क्रीमी लेयर’ का सिद्धांत लागू नहीं होता है। सरकार ने उन जनहित याचिकाओं का विरोध किया, जिनमें SC-ST आरक्षण के भीतर भी आय या संपन्नता के आधार पर क्रीमी लेयर लागू करने की मांग की गई थी। आपको बता दें कि देश की शीर्ष अदालत ने सरकारी नौकरियों में क्रीमी लेयर के कैंडिडेट के आरक्षण लेने पर चिंता जताई थी। कोर्ट ने कहा- यदि माता-पिता दोनों IAS अफसर हैं, तो उनके बच्चों को आरक्षण क्यों मिलना चाहिए ? अगर संपन्न बच्चों के लिए फिर से आरक्षण मांगा जाए, तो हम कभी भी इस चक्र से बाहर नहीं निकल पाएंगे। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने ये कमेंट तब किया था। जब वे कर्नाटक हाईकोर्ट के एक फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रहे थे।
SC ST Creamy Layer : याचिकाकर्ता को क्रीमी लेयर के आधार पर आरक्षण के दायरे से बाहर रखा गया था, क्योंकि उसके माता-पिता दोनों ही राज्य सरकार के कर्मचारी हैं। जिसके बाद केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के आरक्षण में क्रीमी लेयर का सिद्धांत लागू नहीं होता। केंद्र ने कहा कि याचिकाओं में संविधान के तहत किसी मौलिक अधिकार के उल्लंघन का जिक्र नहीं है। साथ ही, मौजूदा कानून में कहीं भी यह प्रावधान नहीं है कि क्रीमी लेयर का नियम SC-ST पर लागू होता है।
SC ST Creamy Layer : सरकार के मुताबिक, यह अवधारणा सिर्फ OBC और SEBC आरक्षण से जुड़ी है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 11 अगस्त को रमाशंकर प्रजापति और अन्य की जनहित याचिकाओं पर केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया था। याचिका में कहा गया कि अगर किसी SC-ST परिवार का सदस्य पहले ही संवैधानिक या वरिष्ठ सरकारी पद हासिल कर चुका है, तो उसके बच्चों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए। इससे आरक्षण का फायदा आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद लोगों तक ज्यादा समान रूप से पहुंच सकेगा। याचिकाकर्ताओं ने आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को उप-श्रेणी बनाकर उन्हें प्रवेश और सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता देने की भी मांग की है।

