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MP: भिंड कलेक्टर का छात्र को थप्पड़ मारते वीडियो वायरल, उठे सवाल

MP: भिंड कलेक्टर का छात्र को थप्पड़ मारते वीडियो वायरल, उठे सवाल MP: भिंड कलेक्टर का छात्र को थप्पड़ मारते वीडियो वायरल, उठे सवाल

🔸 घटना की शुरुआत: एक वायरल वीडियो ने मचाया बवाल

मध्य प्रदेश के भिंड ज़िले से एक हैरान करने वाला वीडियो सामने आया है जिसमें ज़िला कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव एक छात्र को बार-बार थप्पड़ मारते हुए नज़र आ रहे हैं। यह घटना 1 अप्रैल को दीनदयाल डंगरोलिया महाविद्यालय में हुई थी, लेकिन इसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।


🔸 वीडियो में क्या दिखा?

वायरल वीडियो में कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव बीएससी द्वितीय वर्ष की गणित परीक्षा के दौरान एक छात्र को डांटते और उसके कागज की जांच करते नजर आ रहे हैं।

  • वह छात्र को उसकी सीट से खींचकर उठाते हैं और उसे कई बार थप्पड़ मारते हैं।
  • एक अन्य क्लिप में कलेक्टर उसे एक स्टाफ रूम जैसी जगह पर ले जाते हैं, जहां उत्तर पुस्तिका किसी अन्य व्यक्ति को सौंपी जाती है।
  • इसके बाद वे छात्र से पूछते हैं – “तेरा पेपर कहां है?” – और फिर से थप्पड़ मारते हैं।

🔸 छात्र का पक्ष: IAS होने की वजह से नहीं किया विरोध

पीड़ित छात्र की पहचान रोहित राठौर के रूप में हुई है। उसने मीडिया से बातचीत में बताया कि थप्पड़ों की वजह से उसके कान पर असर हुआ, लेकिन उसने विरोध नहीं किया क्योंकि सामने एक आईएएस अधिकारी थे।


🔸 कलेक्टर का जवाब: “मैं नकल माफिया की जांच कर रहा था”

कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव ने अपने बचाव में कहा कि उन्हें परीक्षा केंद्र पर संगठित नकल की शिकायत मिली थी।

  • उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ छात्र प्रश्न पत्र बाहर भेजकर हल करवा रहे थे और फिर उत्तर अंदर ला रहे थे।
  • NDTV से बातचीत में उन्होंने कहा, “मैं एक संगठित नकल रैकेट की जांच करने गया था। मैंने विश्वविद्यालय को पत्र लिखा है कि इस कॉलेज को आगे से परीक्षा केंद्र न बनाया जाए।”

🔸 कॉलेज से जुड़े राजनीतिक संबंध

जिस कॉलेज में यह घटना घटी, वह नारायण डंगरोलिया के स्वामित्व वाला बताया जा रहा है, जो मध्य प्रदेश में विपक्ष के उपनेता हेमंत कटारे के ससुर हैं। इस कारण यह मामला और भी संवेदनशील हो गया है।


🔸 कलेक्टर पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल

यह पहली बार नहीं है जब संजीव श्रीवास्तव विवादों में आए हों।

  • हाल ही में ग्वालियर हाईकोर्ट की बेंच ने भी एक मामले की सुनवाई के दौरान उनके आचरण पर सवाल उठाते हुए पूछा था – “क्या ऐसे अधिकारी को फील्ड में रहने देना उचित है?”

🔍 क्या कहती है यह घटना?

यह घटना कई अहम सवाल खड़े करती है:

  • क्या कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए इस तरह की शारीरिक हिंसा जायज़ है?
  • क्या अधिकारी नकल के खिलाफ कार्यवाही करते हुए छात्रों के मूल अधिकारों का उल्लंघन कर सकते हैं?

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