Bhopal मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खिवनी वन्य-प्राणी अभयारण्य की बदलती तस्वीर पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे वन्यजीव संरक्षण की एक बड़ी सफलता बताया है। कभी केवल एक ‘ट्रांजिट कॉरिडोर’ के रूप में पहचाने जाने वाला यह क्षेत्र अब बाघों के स्थायी और सुरक्षित बसेरे के रूप में वैश्विक पटल पर उभर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के अनुसार, खिवनी अभयारण्य में बाघों की प्राकृतिक रूप से बढ़ती संख्या राज्य सरकार की प्रभावी नीतियों का परिणाम है। अब सरकार का विजन इसे एक प्रमुख इको-टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करना है, जिससे स्थानीय रोजगार और संरक्षण दोनों को मजबूती मिलेगी।

Bhopal ‘युवराज’ और ‘मीरा’ के कुनबे से मिली नई पहचान
मालवा-निमाड़ के शुष्क पर्णपाती वनों में 134.7 वर्ग किलोमीटर में फैले खिवनी अभयारण्य को बाघ ‘युवराज’ और ‘मीरा’ ने अपना स्थायी घर बनाया है। हाल ही में वन विभाग ने बाघिन ‘मीरा’ द्वारा तीन शावकों को जन्म देने की पुष्टि की है, जो अब जंगल में अपनी मां के साथ सक्रिय हैं। वर्तमान में यहाँ लगभग एक दर्जन बाघों की मौजूदगी दर्ज की गई है, जो इस क्षेत्र के पारिस्थितिक तंत्र के सुदृढ़ होने का प्रमाण है।

Bhopal दुर्लभ वन्यजीवों की मौजूदगी और संतुलित पारिस्थितिकी
खिवनी केवल बाघों के लिए ही नहीं, बल्कि अन्य वन्यजीवों के लिए भी आदर्श आवास बन गया है। यहाँ तेंदुओं, लकड़बग्घा, सियार और भालू के साथ-साथ दुर्लभ जंगली कुत्तों (ढोल) की सक्रियता भी देखी जा रही है। इसके अलावा, चौसिंगा जैसे दुर्लभ शाकाहारी जीवों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि यहाँ की शिकार-शिकारी श्रृंखला पूरी तरह संतुलित और पुनर्जीवित हो चुकी है।

Bhopal कॉरिडोर से मुख्य आवास तक का ऐतिहासिक सफर
1982 में स्थापित इस अभयारण्य का बाद में विस्तार कर सीहोर जिले के वन क्षेत्रों को इसमें जोड़ा गया था। पहले इसे केवल बड़े वनों (जैसे रातापानी) के बीच एक रास्ते (ट्रांजिट कॉरिडोर) के रूप में देखा जाता था। अब राज्य सरकार ओंकारेश्वर वन्य-प्राणी अभयारण्य के विकास के माध्यम से इस नेटवर्क को और भी सशक्त कर रही है, ताकि वन्यजीवों का निर्बाध विचरण सुनिश्चित हो सके।





