Guna District Private School Reality Check गुना जिले में शिक्षा व्यवस्था बदहाल: छोटे मकानों, दुकानों और तबेलेनुमा कमरों में चल रहे निजी स्कूल; नियमों की अनदेखी कर 534 को बांटी मान्यता

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Guna District Private School Reality Check

रिपोर्ट: विजय अहिरवार

Guna District Private School Reality Check मध्य प्रदेश के गुना जिले के ग्रामीण और सुदूर इलाकों से शिक्षा के नाम पर व्यावसायिक धांधली और नियमों के उल्लंघन का एक बड़ा मामला सामने आया है। जिले में निजी स्कूलों की दुकानें बड़े पैमाने पर धड़ल्ले से संचालित हो रही हैं, जिन्होंने गरीब व मध्यमवर्गीय अभिभावकों की कमर तोड़कर रख दी है। जिले के सिरसी, बमोरी, फतेहगढ़ और चाचौड़ा जैसे पिछड़े व सुदूर क्षेत्रों में दर्जनों ऐसे स्कूल संचालित हैं, जिनकी इमारतें किसी विद्यालय के बजाय जानवरों के तबेले जैसी प्रतीत होती हैं। आरोप है कि विभागीय अधिकारियों और स्कूल संचालकों के बीच कथित साठगांठ के चलते जमीनी निरीक्षण किए बिना ही, जिला मुख्यालय से बंद कमरों में बैठकर इन स्कूलों को मान्यता की रेवड़ियाँ बांट दी जाती हैं।

Guna District Private School Reality Check नियमों को ताक पर रखकर 534 निजी विद्यालयों को मान्यता

शिक्षा विभाग के कड़े दिशा-निर्देशों और नियमों की सरेआम अनदेखी करते हुए जिले के 534 निजी विद्यालयों को मान्यता सौंप दी गई है। ग्राउंड पड़ताल में यह बात उजागर हुई है कि इनमें से अधिकांश स्कूलों में मान्यता के लिए निर्धारित आधिकारिक गाइडलाइन के एक भी बिंदु का पालन नहीं हो रहा है।

नियमों की अनदेखी करने वाले प्रमुख स्कूलों में ये नाम सामने आए हैं:

  • मारकीमहू क्षेत्र: होली फैमिली और शारदा विद्या निकेतन।
  • आरोन क्षेत्र: अक्षत कॉन्वेंट, ब्रिलियंट पब्लिक, भारद्वाज बाल शिक्षा कॉन्वेंट और लाल बहादुर शास्त्री स्कूल।
  • कुम्भराज क्षेत्र: मिनेश कॉन्वेंट, आईपीएस कॉन्वेंट, स्वास्ति ज्ञान मंदिर और कैरियर कॉन्वेंट।

Guna District Private School Reality Check बमोरी और फतेहगढ़ में गंभीर हालात; शासकीय शिक्षकों पर भी आरोप

आदिवासी बाहुल्य और पिछड़े इलाकों (बमोरी और फतेहगढ़) में स्थिति बेहद चिंताजनक है।

  • शिक्षकों की खुद की ‘दुकानें’: पड़ताल के दौरान यह सनसनीखेज जानकारी सामने आई है कि बमोरी में संचालित हो रहे दो बड़े स्कूलों के पीछे खुद शासकीय (सरकारी) शिक्षकों का ही हाथ है। ये शिक्षक नियमों के विरुद्ध जाकर अपने परिजनों के नाम पर इन निजी स्कूलों का संचालन कर रहे हैं, जहाँ हजारों बच्चों का भविष्य दांव पर है।
  • फतेहगढ़ के बदहाल स्कूल: फतेहगढ़ इलाके में सर्वोदय बाल विद्या मंदिर, एसआरएम मेमोरियल, एकता पब्लिक, जीपीएस कॉन्वेंट, संत ज्ञानेश्वर कपासी और लक्ष्य पब्लिक कुम्हारी जैसे अनेक स्कूल बिना तय मानकों के ग्रामीण अंचलों में संचालित हो रहे हैं।

Guna District Private School Reality Check भारी बस्ते, मोटी फीस लेकिन बुनियादी सुविधाएं शून्य

इन तथाकथित कॉन्वेंट और निजी स्कूलों का फीस ढांचा और निजी प्रकाशकों की महंगी किताबों की कीमतें महानगरों के नामी स्कूलों को टक्कर दे रही हैं। हर नए शैक्षणिक सत्र में अभिभावकों को मोटी फीस और भारी कमीशन वाली किताबें व यूनिफॉर्म खरीदने के लिए विवश किया जाता है। इसके विपरीत, इन स्कूलों की जमीनी हकीकत कुछ इस प्रकार है:

बदहाली के मुख्य बिंदुजमीनी हकीकत और खतरे
स्थान की कमीबच्चों को ठूस-ठूस कर छोटे-छोटे मकानों, दुकानों और कमरों में बिठाया जा रहा है।
मिश्रित कक्षाएंकई स्कूलों में एक ही कमरे के भीतर एक साथ कई अलग-अलग क्लासों का संचालन हो रहा है।
सुरक्षा मानकों की अनदेखीकिसी भी अप्रिय घटना या आगजनी जैसी आपदा से निपटने के लिए सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं।

सुरक्षा मानकों की इस गंभीर अनदेखी के बावजूद शिक्षा विभाग द्वारा इन्हें आसानी से क्लीन चिट देकर मान्यता का नवीनीकरण किया जा रहा है, जो मासूम बच्चों की जिंदगी के साथ एक बड़ा खिलवाड़ है।

प्रशासन का पक्ष

इस पूरे मामले और बदहाली को लेकर शिक्षा विभाग अब हरकत में आया है। राजेश गोयल (अधिकारी, शिक्षा विभाग) के अनुसार:

“अगले दो से तीन दिनों के भीतर एक आधिकारिक आदेश जारी कर 4 सदस्यीय विशेष जांच समिति का गठन किया जाएगा। यह समिति जिले के सभी चिन्हित निजी स्कूलों का जमीनी निरीक्षण करेगी। जांच में संसाधन, इंफ्रास्ट्रक्चर या सुरक्षा मानकों में किसी भी प्रकार की कमी पाए जाने पर संबंधित स्कूल संचालकों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।”

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