School Prayer Controversy : दैनिक प्रार्थना व्यवस्था को लेकर बढ़ा राजनीतिक विवाद
School Prayer Controversy : सरकार द्वारा सरकारी और निजी स्कूलों में दैनिक प्रार्थना गतिविधियों को अनिवार्य किए जाने के फैसले पर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। कांग्रेस के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए सरगुजा कलेक्टर के माध्यम से शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है और आदेश पर पुनर्विचार की मांग की है।

School Prayer Controversy : धर्मनिरपेक्ष भावना के खिलाफ होने का आरोप
अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ का कहना है कि सरकार द्वारा लागू की गई प्रार्थना व्यवस्था एक विशेष धर्म की आस्थाओं पर आधारित प्रतीत होती है, जो देश की धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक भावना के अनुरूप नहीं है। ज्ञापन में सरकार से आग्रह किया गया है कि इस आदेश को वापस लिया जाए अथवा व्यापक चर्चा के बाद इसमें आवश्यक संशोधन किए जाएं।
School Prayer Controversy : रशीद अंसारी ने सरकार पर साधा निशाना
कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष रशीद अहमद अंसारी के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि प्रदेश और देश में महंगाई, बेरोजगारी, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था की अन्य चुनौतियां अधिक गंभीर मुद्दे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इन समस्याओं के समाधान पर ध्यान देने के बजाय शिक्षा संस्थानों को राजनीतिक और सांप्रदायिक बहस का केंद्र बना रही है।

School Prayer Controversy : शिक्षा में संवैधानिक मूल्यों को बढ़ावा देने की मांग
अंबिकापुर शहर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह धंजल ने कहा कि भारत की बहुधार्मिक और बहुसांस्कृतिक पहचान को ध्यान में रखते हुए शिक्षा व्यवस्था में वैज्ञानिक सोच, संवैधानिक मूल्यों और समावेशी दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उनका मानना है कि स्कूलों का वातावरण सभी समुदायों के लिए समान रूप से स्वीकार्य और सम्मानजनक होना चाहिए।
School Prayer Controversy : सरकार पर चुनावी राजनीति का आरोप
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकारें शिक्षा व्यवस्था को चुनावी राजनीति से जोड़ने का प्रयास कर रही हैं। उनका कहना है कि शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों में ज्ञान, वैज्ञानिक सोच और सामाजिक समरसता विकसित करना होना चाहिए, न कि किसी प्रकार का वैचारिक या धार्मिक प्रभाव स्थापित करना।
School Prayer Controversy : प्रदेश में तेज हुई बहस
कांग्रेस के विरोध के बाद स्कूलों में लागू नई प्रार्थना व्यवस्था को लेकर प्रदेश में बहस तेज हो गई है। एक ओर सरकार इसे सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों से जोड़कर देख रही है, वहीं विपक्ष इसे धर्मनिरपेक्षता और संवैधानिक मूल्यों के संदर्भ में चुनौती दे रहा है।
School Prayer Controversy : सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी निगाहें
फिलहाल इस मुद्दे पर सरकार की ओर से कोई नया आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि ज्ञापन सौंपे जाने के बाद अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है और क्या प्रार्थना व्यवस्था में किसी प्रकार का बदलाव किया जाएगा।

