MP Religious Tourism : मध्यप्रदेश अपनी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं, लोक कलाओं और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए देशभर में विशिष्ट पहचान रखता है। प्रदेश सरकार प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ उसे वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। राज्य सरकार द्वारा धार्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और विभिन्न सांस्कृतिक लोकों के निर्माण के माध्यम से प्रदेश की ऐतिहासिक पहचान को मजबूत किया जा रहा है। राज्य सरकार प्रदेशभर में 17 सांस्कृतिक लोक और 20 संग्रहालयों के निर्माण एवं विकास की महत्वाकांक्षी योजना पर कार्य कर रही है। इसका उद्देश्य स्थानीय लोक कला, जनजातीय परंपराओं, इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।
MP Religious Tourism : धर्म और आध्यात्म का प्रमुख केंद्र मध्यप्रदेश, नई पीढ़ी को सांस्कृतिक परंपराओं का संदेश
इन सांस्कृतिक लोकों में प्रदेश के विभिन्न अंचलों की लोक परंपराओं, रीति-रिवाजों, लोकनृत्यों और हस्तशिल्प को जीवंत रूप में प्रदर्शित किया जाएगा। वहीं संग्रहालयों में इतिहास, पुरातत्व, जनजातीय जीवन, कला और संस्कृति से जुड़ी अमूल्य धरोहरों को संरक्षित किया जाएगा।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संस्कृति विभाग की गतिविधियों और योजनाओं की विस्तृत समीक्षा करते हुए प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार पर विशेष जोर दिया। बैठक में विभागीय योजनाओं की प्रगति, सांस्कृतिक आयोजनों, संग्रहालयों और सांस्कृतिक परिसरों के विकास कार्यों की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश की कला, संस्कृति, परम्पराएं और समृद्ध पुरातात्त्विक धरोहरें प्रदेश की अमूल्य पूंजी हैं, जिन्हें संरक्षित और संवर्धित करना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के लिए योजनाबद्ध और प्रभावी प्रयास किए जाएं।प्रदेश के सांस्कृतिक अभ्युदय के लिए हमारी सरकार हर जरूरी प्रयास कर रही है। हम समाज को साथ लेकर इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
MP Religious Tourism : मुख्यमंत्री ने की संस्कृति विभाग की समीक्षा
सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
17 धार्मिक, सांस्कृतिक लोकों के निर्माण की योजनाएं संचालित
प्रदेश में बन रहे 17 सांस्कृतिक लोक और 20 संग्रहालय
आस्था, संस्कृति और पर्यटन को नई गति देना उद्देश्य
समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को सहेजना उद्देश्य
नई पीढ़ी को प्रदेश की संस्कृति से जोड़ना प्राथमिकता
बल्कि पर्यटन को बढ़ावा, स्थानीय कलाकारों को मंच मिलेगा
रोजगार के नए अवसर सृजित करने में भी सहायक सिद्ध होगा
देश की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में मजबूत होगी एमपी की पहचान
सभी समाजों को, उनकी परम्पराओं को जोड़ें- मुख्यमंत्री
आल्हा-ऊदल स्मृति उत्सव और श्रावण महोत्सव भी मनायें
संस्कृति विभाग की करें पुनर्संरचना, गतिविधियों का भी करें विस्तार
सम्राट विक्रमादित्य के नाम से बनायें पृथक अकादमी
तीर्थदर्शन योजना में राज्य के ज्योतिर्लिंगों, शक्तिपीठों, देवस्थानों को भी जोड़ें
आगामी छह-सात माह में बड़े त्यौहार, सांस्कृतिक पर्व एवं मेले मनायें जायेंगे- मुख्यमंत्री
ये सभी त्यौहार हमारी धार्मिक आस्थाओं और प्रकृति के प्रति हमारी कृतज्ञता के प्रतीक।
MP Religious Tourism : एमपी में विरासत से विकास को मिल रहे आयाम
सभी समाजों को, उनकी आस्था, सांस्कृतिक परम्पराओं को जोड़कर वृहद आयोजन करें।
आल्हा-ऊदल वीर रस गायन के प्रतीक हैं, उनकी स्मृति में आयोजन किए जाएं।
नागपंचमी पर जैव विविधता संरक्षण (सर्प प्रजातियों के संरक्षण) का संदेश दिया जाये।
हमारी कला और संस्कृति के संवर्धन के साथ ही सरकार के संदेश का भी प्रसार हो।
श्रीराम वन गमन पथ और श्रीकृष्ण पाथेय परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की
धार्मिक निर्माण कार्यों में और अधिक गति लाने के निर्देश अधिकारियों को दिए।
श्रीराम वन गमन पथ, श्रीकृष्ण पाथेय परियोजनाओं धार्मिक आस्था के केंद्र।
दोनों प्रदेश के सांस्कृतिक और पर्यटन विकास की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण।
प्रदेश में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों से अधिक से अधिक लोगों को जोड़ा जाए।
नई पीढ़ी अपनी समृद्ध कला और सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें।

