एक झकझोर देने वाला सवाल
10 जुलाई 2025 को गुरुग्राम में 25 वर्षीय टेनिस खिलाड़ी राधिका यादव की हत्या ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया। लेकिन यह सिर्फ एक हत्या नहीं थी—यह एक विचारधारा, सामाजिक दबाव, और एक बेटी की आज़ादी के खिलाफ उसके ही पिता की बगावत थी।
सवाल यह है—क्या एक पिता अपनी बेटी की सफलता से इतना डर सकता है कि उसकी जान ले ले? क्या समाज के तानों का बोझ किसी को इतना तोड़ सकता है?
📌 हत्या की वारदात: क्या हुआ उस दिन?
- स्थान: वज़ीराबाद, गुरुग्राम
- समय: सुबह 10:30 बजे
- घटना: किचन में राधिका को उसके पिता दीपक यादव ने गोली मार दी
राधिका के चाचा कुलदीप यादव को पहले लगा कि कोई गैस सिलेंडर या कुकर फटा है। लेकिन किचन में जो दृश्य था, वो खौफनाक था—राधिका खून से लथपथ पड़ी थी और सामने उसके पिता हाथ में पिस्तौल लिए खड़े थे।
पुलिस के अनुसार, राधिका को 5 गोलियां मारी गईं, जिनमें से 3 उसे लगीं। अस्पताल ले जाने तक वह दम तोड़ चुकी थी।
❓ क्यों की गई हत्या?
दीपक यादव ने अपनी बेटी की हत्या करना स्वीकार किया, लेकिन कारण अभी भी पूरी तरह साफ नहीं है। पुलिस की शुरुआती जांच और बयानों के आधार पर कुछ अहम बिंदु सामने आए हैं:
- टेनिस एकेडमी को लेकर विवाद: दीपक नहीं चाहता था कि राधिका अपनी एकेडमी चलाए
- सोशल मीडिया पर सक्रियता: राधिका के रील्स और म्यूजिक वीडियो से पिता को थी परेशानी
- समाज के ताने: “बेटी की कमाई पर पल रहा है” जैसे तानों ने पिता के अहं को चोट पहुंचाई
🎾 राधिका कौन थी?
- राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की टेनिस खिलाड़ी
- खुद की टेनिस एकेडमी स्थापित की थी
- आत्मनिर्भर, सफल और सोशल मीडिया पर एक्टिव
- म्यूजिक वीडियो में भी नजर आई थीं
राधिका की सफलता उसी समाज को खटकने लगी जिसे कभी उसकी उपलब्धियों पर गर्व था।
🤔 परिवार के बयानों में विरोधाभास
🔍 मां की चुप्पी:
- मां मंजू का कहना है कि घटना के वक्त वह नीचे थीं
- चाचा कुलदीप कहते हैं कि मां वहीं ऊपर मौजूद थीं
- सवाल: सच कौन बोल रहा है?
🔍 भाई का गायब होना:
- राधिका का भाई धीरज घटना के वक्त कहां था?
- अब तक उसका कोई सुराग नहीं मिला
- क्या वह भी किसी तरह से शामिल था?
📱 सोशल मीडिया: कारण या बहाना?
राधिका सोशल मीडिया पर रील्स बनाती थीं, वीडियो शूट करती थीं। पिता और भाई को यह सब “इज्जत” के खिलाफ लगता था। उन्हें लगता था कि एक खिलाड़ी को ऐसी चीज़ें शोभा नहीं देतीं।
सोशल मीडिया से जुड़े पहलू:
- म्यूजिक वीडियो में एक्टिंग करना
- पब्लिक फिगर बनना
- ऑनलाइन पहचान बनाना
यह सब राधिका के परिवार को मंजूर नहीं था।
📊 समाज की सोच और बेटियों की सफलता
भारत में बेटों की कमाई गर्व का विषय है, लेकिन बेटियों की सफलता कई बार “तानों” में बदल जाती है।
2023 की State of Working India Report के अनुसार, संपन्न परिवारों में बेटियों का काम करना शर्मिंदगी समझा जाता है।
क्या यही सोच राधिका की मौत की असली वजह बनी?
💡 सोचने पर मजबूर करती यह घटना
- क्या यह हत्या एक सोची-समझी मानसिकता का परिणाम थी?
- क्या बेटियों की आज़ादी अभी भी भारतीय समाज में बोझ मानी जाती है?
- क्या परिवार के भीतर ही बेटियों को सम्मान और सुरक्षा नहीं मिल पा रही?
⚠️ राधिका की हत्या नहीं, समाज की हार
यह मामला सिर्फ एक घरेलू अपराध नहीं, हमारे समाज की सोच पर सवाल है। एक ऐसी सोच जो बेटी की कमाई को बोझ मानती है। एक ऐसी सोच जो बेटियों की सफलता से डर जाती है।
राधिका की हत्या बताती है कि जब तक हम बेटियों की आज़ादी को लेकर अपनी मानसिकता नहीं बदलते, तब तक ना तो राधिकाएं सुरक्षित हैं और ना ही समाज की “इज्जत”।
🔚 निष्कर्ष: क्या हम बदल पाएंगे?
इस घटना ने हमें झकझोर दिया है। यह एक चेतावनी है कि अगर हमने अब भी बेटियों की आज़ादी को सम्मान नहीं दिया, तो न जाने कितनी और राधिकाएं कुर्बान होंगी।
हमें यह समझना होगा:
- बेटी की कमाई इज्जत है, शर्म नहीं
- बेटी की आज़ादी गर्व है, बोझ नहीं
- सम्मान और बराबरी हर रिश्ते की बुनियाद होनी चाहिए





