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ऑपरेशन सिंदूर को मिला वैश्विक समर्थन: भारत के लिए क्यों है यह कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण

BY: Yoganand Shrivastva

भारत द्वारा हाल ही में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों पर की गई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नामक सैन्य कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक समर्थन प्राप्त हो रहा है। अमेरिका, फ्रांस, इजरायल, ब्रिटेन और अन्य कई देशों ने इस ऑपरेशन की सराहना की है और आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख को न्यायोचित बताया है।

किन देशों ने दिया समर्थन?

अमेरिका
अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य श्री थानेदार ने भारत के आत्मरक्षा के अधिकार की पुष्टि करते हुए कहा कि आतंकवाद को किसी भी सूरत में सहन नहीं किया जा सकता। उन्होंने आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ भारत के कदमों को उचित करार दिया और अपने समर्थन की बात दोहराई।

फ्रांस
फ्रांस के विदेश मंत्रालय ने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की निंदा करते हुए भारत की जवाबी कार्रवाई का समर्थन किया। एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि फ्रांस भारत के साथ आतंकवाद के विरुद्ध इस संघर्ष में पूरी तरह एकजुट है।

ब्रिटेन
ब्रिटेन के विदेश मंत्री ने हमले को ‘भीषण’ बताया और भारत के आक्रोश को स्वाभाविक करार दिया। ब्रिटिश सांसद ऋषि सुनक और प्रीति पटेल ने भी भारत की सैन्य कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि किसी भी देश को आतंकी हमलों के खिलाफ कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है।

इजरायल
भारत में इजरायल के राजदूत ने कहा कि इजरायल भारत के आत्मरक्षा के अधिकार का पूरी तरह समर्थन करता है। उन्होंने दोहराया कि आतंकियों को यह समझ लेना चाहिए कि निर्दोषों की हत्या के लिए कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं है।

नीदरलैंड
डच सांसद गीर्ट वाइल्डर्स ने भारत का समर्थन करते हुए कश्मीर को पूरी तरह भारतीय बताया और ट्वीट में #PakistanBehindPahalgam जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर पाकिस्तान की आलोचना की।

पनामा
पनामा के विदेश मंत्रालय ने भी भारत के प्रति एकजुटता व्यक्त की और आतंकवाद के खिलाफ चल रही वैश्विक लड़ाई में भारत के साथ खड़ा होने की बात कही। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि पनामा वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य है।

यह समर्थन क्यों है अहम?

भारत की सीमा पार सैन्य कार्रवाई के बाद प्रमुख वैश्विक शक्तियों का समर्थन दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब पाकिस्तानी आतंकवाद के प्रति अधिक सजग और स्पष्ट रुख अपना रहा है। भारत के वैश्विक संबंधों में आई मजबूती और कूटनीतिक प्रभाव के कारण अब ऐसे ऑपरेशनों को वैश्विक समर्थन मिलना अपेक्षाकृत आसान हुआ है।

इसके अलावा, इन बयानों से यह भी स्पष्ट होता है कि परमाणु हथियारों से लैस देशों के बीच तनावपूर्ण स्थिति में भी भारत की कार्रवाई को एक दायित्वपूर्ण आत्मरक्षा के रूप में देखा जा रहा है, न कि आक्रामकता के रूप में।

पाकिस्तान के पक्ष में समर्थन या सहानुभूति व्यक्त करने वाले देश:

1. चीन:

चीन ने भारत के हमलों पर चिंता व्यक्त की है और दोनों देशों से संयम बरतने का आग्रह किया है। चीन ने पाकिस्तान के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए, इस मुद्दे पर पाकिस्तान के प्रति सहानुभूति दिखाई है।

2. ईरान:

ईरान ने भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता की पेशकश की है और दोनों देशों से संयम बरतने का आग्रह किया है। ईरान का यह रुख पाकिस्तान के प्रति सहानुभूति दर्शाता है।

3. कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE):

इन देशों ने भी भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव पर चिंता व्यक्त की है और दोनों पक्षों से संयम बरतने का आग्रह किया है। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर पाकिस्तान का समर्थन नहीं किया है, लेकिन उनके बयानों में पाकिस्तान के प्रति सहानुभूति झलकती है।

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