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बिलावल भुट्टो का बड़ा कबूलनामा: पाकिस्तान ने दिया था आतंकवाद को समर्थन

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BY: Yoganand Shrivastva

नई दिल्ली, जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के कुछ ही दिनों बाद पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो का बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया है कि पाकिस्तान का इतिहास आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने से जुड़ा रहा है। यह पहली बार नहीं है—इससे पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ भी इसी प्रकार की स्वीकारोक्ति कर चुके हैं।

पाकिस्तान का चरमपंथ से पुराना रिश्ता:
बिलावल भुट्टो ने ब्रिटिश मीडिया चैनल ‘स्काई न्यूज’ को 1 मई को दिए एक साक्षात्कार में कहा, “जहां तक रक्षा मंत्री की बात है, यह कोई रहस्य नहीं कि पाकिस्तान का अतीत आतंकवादी संगठनों से जुड़ा रहा है।” उन्होंने विशेष रूप से 1980 के दशक में अफगान युद्ध के दौरान मुजाहिदीनों को दी गई मदद का उल्लेख करते हुए बताया कि यह पश्चिमी ताकतों के साथ मिलकर किया गया था।

भुट्टो ने आगे कहा कि पाकिस्तान विभिन्न दौरों में उग्रवाद की कई लहरों से गुजर चुका है, जिससे देश को खुद भी भारी नुकसान उठाना पड़ा है। हालाँकि, उन्होंने यह भी जोर दिया कि अब हालात बदल रहे हैं।

“आतंकवाद हमारे अतीत का हिस्सा, लेकिन अब सुधार की राह पर हैं”: भुट्टो
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के प्रमुख और पूर्व विदेश मंत्री बिलावल ने यह स्पष्ट किया कि देश अब आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कदम उठा रहा है। उन्होंने कहा कि देश ने आतंकी समूहों के खिलाफ गंभीर सैन्य अभियान चलाए हैं, खासकर उनकी मां और पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या के बाद, जिसके बाद राज्य की नीति में बड़ा बदलाव आया।

रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की भी स्वीकारोक्ति:
कुछ ही दिन पहले स्काई न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी खुलकर माना कि पाकिस्तान ने दशकों तक आतंकवादियों को प्रशिक्षण, संसाधन और समर्थन दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि यह सब अमेरिका और ब्रिटेन जैसे पश्चिमी देशों के लिए किया गया था और इसे “गंदा काम” बताया। उन्होंने कहा, “यह एक गलती थी जिसकी हमें भारी कीमत चुकानी पड़ी।”

पहलगाम हमले के बाद भारत का सख्त रुख:
22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के लोकप्रिय पर्यटक स्थल पहलगाम की बैसरन घाटी में आतंकियों ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी थी, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी।

इस घटना के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। भारत ने सख्त कदम उठाते हुए सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया, अटारी चेक पोस्ट बंद कर दी और पाकिस्तानी नागरिकों के लिए वीजा सेवाएं रोक दीं। इसके जवाब में पाकिस्तान ने शिमला समझौते को निलंबित करने और भारतीय विमानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद करने की घोषणा की।

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