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Major political reshuffle in Parliament: विपक्ष में बगावत से मजबूत हुआ NDA, परिसीमन और महिला आरक्षण बिल पास होने की उम्मीदें तेज

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Major political reshuffle in Parliament

Major political reshuffle in Parliament टीएमसी और शिवसेना (UBT) में ऐतिहासिक टूट, एनडीए के पाले में आए कई सांसद

Major political reshuffle in Parliament देश की राजनीति में पिछले दो हफ्तों के भीतर एक बड़ा और अप्रत्याशित उलटफेर देखने को मिला है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) और महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना में हुई बड़ी बगावत ने दिल्ली का सियासी समीकरण पूरी तरह बदल दिया है। टीएमसी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसदों ने बगावत का बिगुल फूंकते हुए एक नया गुट ‘नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) बना लिया है, जो एनडीए (NDA) में शामिल होने जा रहा है। वहीं, महाराष्ट्र में उद्धव गुट के 9 में से 6 सांसदों के एकनाथ शिंदे के साथ जाने की चर्चा तेज है। इस बिखराव का सीधा फायदा आगामी मानसून सत्र में केंद्र सरकार को संविधान संशोधन बिल पास कराने में मिलेगा।

Major political reshuffle in Parliament लोकसभा का बदला अंकगणित: दो-तिहाई बहुमत के बेहद करीब पहुंची सरकार

संसद में महिला आरक्षण पैकेज और परिसीमन से जुड़े महत्वपूर्ण संविधान संशोधन बिल को पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। लोकसभा की वर्तमान स्थिति (3 सीटें खाली होने के कारण) के अनुसार, इस जादुई आंकड़े के लिए 360 सांसदों का समर्थन जरूरी है।

  • नया समीकरण: टीएमसी के बागियों को मिलाकर एनडीए के पास फिलहाल 318 सांसद हैं।
  • कमी हुई दूर: पहले जहाँ सरकार दो-तिहाई बहुमत से 54 वोट दूर थी, वहीं टीएमसी के 20 और शिवसेना के 6 संभावित बागी सांसदों के आने से यह अंतर घटकर अब सिर्फ 28 वोटों का रह गया है।
  • DMK का फैक्टर: तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी डीएमके (DMK) का कांग्रेस से गठबंधन टूटने के बाद, कयास लगाए जा रहे हैं कि वह एनडीए को समर्थन दे सकती है। यदि डीएमके के 22 सांसद साथ आते हैं, तो एनडीए का आंकड़ा 348 पहुंच जाएगा और उसे बहुमत के लिए महज 6 और वोटों की जरूरत होगी, जिसे छोटी क्षेत्रीय पार्टियों के जरिए जुटाने की रणनीति बनाई जा रही है।

Major political reshuffle in Parliament राज्यसभा में भी राह हुई आसान, ‘एक देश एक चुनाव’ का रास्ता साफ!

लोकसभा के साथ-साथ उच्च सदन यानी राज्यसभा में भी एनडीए के लिए राहें आसान होती दिख रही हैं। राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के लिए 164 वोटों की दरकार है, जहाँ एनडीए के पास अभी 150 सदस्य हैं। यदि यहाँ भी डीएमके के 8 सांसदों का साथ मिलता है, तो यह संख्या 158 हो जाएगी। बाकी बचे 6 वोटों की कमी को तृणमूल सांसदों के इस्तीफे से खाली हुई सीटों पर उपचुनाव और अन्य छोटे दलों के सहयोग से पूरा कर लिया जाएगा। यदि दोनों सदनों में यह गणित बैठ जाता है, तो आगामी मानसून सत्र में महिला आरक्षण, परिसीमन बिल और ‘एक देश एक चुनाव’ जैसे कड़े कानूनों को अमलीजामा पहनाने का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा।

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