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Azamgarh Police: अनाथ हुई बच्चियों के भविष्य के लिए आगे आई आजमगढ़ पुलिस, पुलिसकर्मी देंगे वेतन से सहायता

Azamgarh Police

BY: Yoganand Shrivastva

Azamgarh Police आजमगढ़ में हाल ही में हुए संवेदनशील रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस का मानवीय चेहरा सामने आया है। दो मासूम बच्चियों को सुरक्षित बचाने वाली आजमगढ़ पुलिस अब उनके भविष्य को संवारने के लिए भी आगे आई है। एसएसपी डॉ. अनिल कुमार ने अपना एक महीने का वेतन और जिले के पुलिसकर्मियों ने एक दिन का वेतन बच्चियों की सहायता के लिए देने का निर्णय लिया है। यह राशि दोनों बच्चियों के नाम पर सावधि जमा (एफडी) के रूप में जमा कराई जाएगी।

शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी मिलेगा सहयोग

Azamgarh Police पुलिस के अनुसार घटना में अरविंद, उसकी पत्नी और 9 वर्षीय पुत्र की मृत्यु के बाद परिवार में केवल वृद्ध माता और दो बच्चियां बची हैं। दोनों बच्चियां अपने परिजनों के साथ सुरक्षित हैं। पुलिस उनके पालन-पोषण और शिक्षा में हरसंभव सहयोग कर रही है। घटना से हुए मानसिक आघात को देखते हुए 11 वर्षीय बच्ची के लिए चाइल्ड साइकेट्रिस्ट से परामर्श और आवश्यक मनोवैज्ञानिक सहायता की भी व्यवस्था की जा रही है।

सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की पहल

Azamgarh Police घटना में जान गंवाने वाले धर्मेंद्र पाठक और अखिलेश मिश्रा के परिजनों को पात्रता के अनुसार सरकारी सहायता दिलाने के लिए एसएसपी ने जिलाधिकारी से बातचीत की है। पुलिस आवश्यक दस्तावेज और बैंक खातों की जानकारी जुटाकर जिला प्रशासन के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराने में सहयोग करेगी। दोनों परिवारों को राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के तहत आर्थिक सहायता दिलाने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।

इसके अलावा दोनों बच्चियों को मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना का लाभ दिलाने तथा वृद्ध माता को वृद्धावस्था पेंशन और अन्य पात्र सदस्यों को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए जिला प्रशासन से समन्वय किया गया है।

आठ घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन में बचाई गई थी बच्चियों की जान

Azamgarh Police यूपी पुलिस के मुताबिक 22 और 23 सितंबर 2026 की रात आजमगढ़ के आहरौला थाना क्षेत्र के शम्भूपुर गांव में तीन लोगों की हत्या के बाद आरोपी अरविंद अपने तीन बच्चों और लाइसेंसी रिवॉल्वर के साथ कमरे में बंद हो गया था। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस ने विशेष रणनीति के तहत रेस्क्यू अभियान शुरू किया। करीब सात से आठ घंटे तक लगातार बातचीत कर आरोपी को आत्मसमर्पण करने और बच्चों को सुरक्षित बाहर भेजने के लिए समझाया गया।

इस दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एटीएस की टीम भी मौके पर मौजूद रही। देर रात कमरे के भीतर गोली चलने की आवाज सुनाई देने के बाद एसएसपी डॉ. अनिल कुमार, एसओजी प्रभारी संजय सिंह और आरक्षी प्रदीप ने दरवाजा तोड़कर कमरे में प्रवेश किया। पुलिस को देखते ही आरोपी ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई के बीच पुलिस टीम ने दोनों बच्चियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। हालांकि 9 वर्षीय शौर्य को उसके पिता की गोली लग चुकी थी। उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम और बैलिस्टिक जांच में भी पुष्टि हुई कि बच्चे को उसके पिता की रिवॉल्वर से चली गोली लगी थी।

डीजीपी ने की पुलिस टीम की सराहना

Azamgarh Police डीजीपी राजीव कृष्ण ने आजमगढ़ पुलिस की कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि पुलिस ने बेहद कठिन परिस्थितियों में धैर्य, साहस और कुशल रणनीति का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस का दायित्व केवल कानून व्यवस्था बनाए रखना ही नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में जरूरतमंदों के साथ खड़े होकर उन्हें सामान्य जीवन की ओर लौटने में सहयोग देना भी है। आजमगढ़ पुलिस ने इस मामले में अपनी संवेदनशीलता और मानवीय जिम्मेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है।

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