Opposition Defections in India : देश की राजनीति में इन दिनों दलबदल और विपक्षी दलों में टूट का सिलसिला तेज होता दिखाई दे रहा है। कई राज्यों में विपक्षी दलों के सांसदों और विधायकों के पाला बदलने की घटनाओं ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। इससे विपक्षी एकता और गठबंधन की मजबूती पर भी सवाल उठने लगे हैं। पहले बंगाल और अब उसके बाद महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी में सांसदों के पाला बदलने की सियासत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हुई, इससे आगे उत्तरप्रदेश में भी सपा विधायकों, सांसदों के पाला बदलने की अटकलों ने यूपी का राजनीतिक पारा हाई कर दिया है। दरअसल हाल के दिनों में कई क्षेत्रीय दलों और राष्ट्रीय विपक्षी दलों में आंतरिक मतभेद खुलकर सामने आए हैं।
Opposition Defections in India : ममता के बाद उद्धव की बारी, सपा में भी टूट की तैयारी ?
नेताओं के इस्तीफे, गुटबाजी और राजनीतिक निष्ठा बदलने की घटनाओं ने विपक्ष की रणनीति को प्रभावित किया है। इससे अब विपक्ष के सामने एकजुटता बनाए रखने की चुनौती बढ़ गई है। हालांकि विपक्षी दल दलबदल को लोकतंत्र के लिए खतरा बताते रहे हैं, वहीं सत्तापक्ष इसे नेताओं की वैचारिक सहमति और राजनीतिक विकल्प का हिस्सा करार देता है। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि विपक्ष अपनी एकता को किस तरह कायम रख पाता है और बदलते राजनीतिक समीकरण देश की राजनीति को किस दिशा में ले जाते हैं। सवाल यह है कि क्या ये घटनाएं विपक्षी एकता को कमजोर करेंगी या फिर नए राजनीतिक समीकरणों को जन्म देंगी ? इसी मुद्दे पर चर्चा करेंगे लेकिन पहले देखिए हमारी यह खास रिपोर्ट।
Opposition Defections in India : देश की सियासत में दलबदल का दौर, किसका कितना जोर ?
देश की विपक्षी राजनीति में इन दिनों दल-बदल और टूट का मानो सीजन चर रहा है। गठबंधन के कई घटक दलों में आंतरिक असंतोष, बगावत और दल-बदल की राजनीति ने विपक्षी गठबंधन की मजबूती पर तो सवाल खड़े कर ही दिए हैं। साथ ही इस विखंडन ने क्षेत्रीय दलों की एकजुटता और आंतरिक कलह को भी सतह पर ला दिया है। पहले पश्चिम बंगाल में तख्तापलट के बाद ममता बनर्जी की पार्टी खंड खंड हो गई। तो वहीं महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे खेमे में एक बार फिर विखंडन। दावा उत्तर प्रदेश की राजनीति में सपा की टूट का भी किया जा रहा है। दरअसल महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर से उद्धव ठाकरे को बड़ा सियासी झटका लगा है। उद्धव की पार्टी के 6 लोकसभा सांसदों ने अपनी सियासी राह अलग चुन ली है और उन्होंने लोकसभा स्पीकर को भी पत्र सौंप दिया है।
Opposition Defections in India : असंतोष, बगावत और दलबदल, टूट से बढ़ी सियासी हलचल
दावा है कि UBT के कई सांसद और विधायक पाला बदलकर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की तैयारी में हैं। शिंदे गुट के नेताओं की माने तो उद्धव गुट के 7 सांसद और करीब 14 से 16 विधायक उनके संपर्क में हैं। इन दावों को और बल उस वक्त मिला जब उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई एक अहम बैठक में कुल 9 लोकसभा सांसदों में से केवल 4 सांसद ही शामिल हुए, 5 नदारद। लेकिन संजय राउत ने इन दावों को सिरे से खारिज किया। भाजपा पर ED-CBI जैसी केंद्रीय एजेंसियों के दबाव और सांसदों को 50 करोड़ तक के ऑफर का गंभीर आरोप लगाया। उधर शिंदे गुट के नेताओं ने कहा कि असंतुष्ट जनप्रतिनिधियों के लिये शिंदे शिवसेना के दरवाजे हमेशा खुले हैं।
Opposition Defections in India : केजरीवाल, ममता, उद्धव… सपा में टूट के दावों में कितन दम ?
उधर उत्तर प्रदेश में भी अखिलेश यादव को अपनी पार्टी में संभावित टूट की अटकलों का सामना करना पड़ रहा है। योगी सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी में बड़ी टूट का दावा किया है। NDA के मंत्री राजभर ने सोशल मीडिया पोस्ट पर लिखा कि महाराष्ट्र बंगाल की बात छोड़िये यूपी में पूरी समाजवादी पार्टी बीजेपी में शामिल होने के लिए तैयार बैठी है। राजभर ने एक साल पहले मार्च के एक वीडियो का हवाला भी दिया कि रामगोपाल यादव ने एक पर्ची केंद्रीय गृह मंत्री को दे दी है। हालांकि, राजभर ने कथित पर्ची को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी साझा नहीं की। उन्होंने यह भी कहा था कि पुराने घोटालों की जांच के दबाव से सपा नेतृत्व परेशान है, जिसके चलते नेता पाला बदल रहे हैं। हालांकि समाजवादी पार्टी नेतृत्व ने इन दावों को खारिज करते हुए पार्टी को एकजुट बताया है।
ममता बनर्जी की पार्टी से लेकर उद्धव ठाकरे के खेमे तक विपक्षी दलों में टूट के संकट ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। तो वहीं उत्तरप्रदेश में सपा प्रमुख अखिलेश यादव की राजनीति क्षमता और भरोसे को नई हवा दे दी है। अब जिस तरह से विपक्षी गठबंधन के घटक दलों में टूट और दलबदल हो रहा है। राज्यों में क्षेत्रीय दलों के अलग-अलग हित, नेतृत्व की महत्वाकांक्षाएं, आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों की रणनीति, INDIA गठबंधन की सबसे बड़ी चुनौती बनती जा रही है। उधर कई सहयोगी दल अब राष्ट्रीय राजनीति से ज्यादा अपने-अपने राज्यों की राजनीतिक मजबूती पर ध्यान दे रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि क्या 2029 की लड़ाई से पहले INDIA गठबंधन घटक दलों के नेताओं को एकजुट रख पाएगा, या फिर सांसद-विधायकों की टूट विपक्षी एकता को और कमजोर करेगी। अब इंडिया गठबंधन के दलों में टूट और भाजपा की रणनीति को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक समीकरण किस करवट बैठते हैं, इस पर सबकी नजर रहेगी।

