Bokaro JTET 2026: 18 साल का इंतजार और फिर प्रशासनिक लापरवाही, 32 प्रश्नपत्रों ने बिगाड़ा सैकड़ों अभ्यर्थियों का भविष्य

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Bokaro

Report: Sanjeev kumar

Bokaro झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) के आयोजन में एक बड़ी और शर्मनाक चूक सामने आई है। 18 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद आयोजित हो रही इस परीक्षा के पहले ही दिन बोकारो के सेक्टर 9 स्थित सरदार पटेल पब्लिक स्कूल केंद्र पर भारी हंगामा हुआ। एक सेट के 32 प्रश्नपत्र केंद्र पर नहीं पहुँचने के कारण परीक्षा नहीं हो सकी, जिससे सैकड़ों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है।

Bokaro 10 बजे से थी परीक्षा, 1 बजे तक नहीं पहुँचा पर्चा

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, प्रथम पाली की परीक्षा सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक होनी थी। अभ्यर्थियों को सुबह 8 बजे ही केंद्र के भीतर प्रवेश दे दिया गया था। परीक्षा शुरू होने के समय जब 32 प्रश्नपत्र कम मिले, तो हड़कंप मच गया। बोकारो डीसी अजय नाथ झा ने अभ्यर्थियों को आश्वासन दिया कि प्रश्नपत्रों का सेट गलती से धनबाद चला गया है और एक घंटे में मँगा लिया जाएगा। लेकिन विडंबना यह रही कि परीक्षा का समय समाप्त होने यानी 1 बजे तक भी प्रश्नपत्र केंद्र पर नहीं पहुँच सके।

Bokaro ‘भ्रष्टाचार और लापरवाही’: अभ्यर्थियों ने लगाए गंभीर आरोप

आक्रोशित अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्हें केंद्र के भीतर किसी कैदी की तरह रखा गया। परीक्षार्थियों ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए इसे ‘प्रशासनिक भ्रष्टाचार’ और ‘लापरवाही’ करार दिया है। उनका तर्क है कि धनबाद और बोकारो की दूरी इतनी नहीं है कि 3 घंटे में भी प्रश्नपत्र न लाए जा सकें। अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि जानबूझकर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया है। मौके पर डीसी और एसपी सहित भारी पुलिस बल तैनात रहा, लेकिन किसी भी प्रशासनिक अधिकारी ने मीडिया के सामने आकर स्थिति स्पष्ट नहीं की।

Bokaro मंत्री ने जेपीएससी को घेरा, मीडिया पर लगाई गई पाबंदी

मामले की गंभीरता को देखते हुए बोकारो पहुँचे मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने इसे JPSC की बड़ी लापरवाही बताया है। उन्होंने कहा कि डीसी से इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है और इसे सरकार के संज्ञान में लाकर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर, कवरेज करने पहुँचे पत्रकारों को भी प्रशासन ने रोकने का प्रयास किया, जिससे तनाव और बढ़ गया। मीडिया को सूचना देने से बचने की कोशिशों ने प्रशासन की मंशा पर और अधिक सवाल खड़े कर दिए हैं।

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