Haridwar : धर्मनगरी हरिद्वार की अधिष्ठात्री देवी मां मायादेवी के प्रांगण में शुक्रवार को रंगभरी (आमलकी) एकादशी का उत्सव आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। बद्रीनाथ पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य राजेश्वरानंद गिरि महाराज की अध्यक्षता और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के वरिष्ठ पदाधिकारियों के सानिध्य में आयोजित इस समारोह में देश भर से आए संतों ने विश्व कल्याण की कामना की।

जगद्गुरु स्वामी चक्रपाणि नंद गिरि महाराज का चादर विधि अभिषेक
Haridwar समारोह का मुख्य आकर्षण जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी चक्रपाणि नंद गिरि महाराज का चादर विधि से किया गया अभिषेक रहा। श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज (अध्यक्ष, अखाड़ा परिषद) और श्रीमहंत हरि गिरि महाराज (महामंत्री, अखाड़ा परिषद) के मार्गदर्शन में यह विधि संपन्न हुई। संतों ने कहा कि सनातन धर्म की पताका पूरे विश्व में फहराने और हिंदुओं को एकजुट करने के संकल्प के साथ इस नए अभियान का श्रीगणेश पवित्र मायादेवी मंदिर से हुआ है।

पंचगव्य की होली और आध्यात्मिक महत्व
Haridwar इस अवसर पर साधु-संतों ने पारंपरिक रंगों के स्थान पर पंचगव्य (गाय के दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर का मिश्रण) से होली खेली। श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने बताया कि पंचगव्य से होली खेलना न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से शुभ है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। उन्होंने रंगभरी एकादशी का महत्व बताते हुए कहा कि इसी दिन भगवान शिव विवाह के पश्चात माता पार्वती का गौना कराकर काशी पहुँचे थे, जिसके उपलक्ष्य में यह उत्सव मनाया जाता है।

हरिद्वार: मोक्ष और आनंद का द्वार
Haridwar श्रीमहंत हरि गिरि महाराज ने हरिद्वार की महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह ‘हरि’ (विष्णु) और ‘हर’ (शिव) दोनों का द्वार है। यहाँ की गई पूजा-अर्चना सीधे महादेव और नारायण तक पहुँचती है। उन्होंने उत्तराखंड के चार धामों को मोक्ष का मार्ग बताया। इस भव्य आयोजन में महामंडलेश्वर हरि चेतनानंद, महामंडलेश्वर ललितानंद, और जूना अखाड़े के कई वरिष्ठ पदाधिकारी व महामंडलेश्वर उपस्थित रहे, जिन्होंने सामूहिक रूप से सनातन धर्म की मजबूती के लिए प्रार्थना की।





