रिपोर्ट : नफीस अहमद
Prayagraj तीर्थराज प्रयाग में आयोजित माघ मेला 2026 के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारतीय संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि माघ मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह भारतीय सभ्यता और सनातन संस्कृति की जीवंत पहचान है।
निषाद समाज और सांस्कृतिक परंपरा का सम्मान
Prayagraj मेला भ्रमण के दौरान प्रभु श्रीराम के बाल सखा महाराज निषादराज गुह्य के वंशज डॉ. बी.के. कश्यप ‘निषाद’ ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। इस अवसर पर योगी आदित्यनाथ ने निषाद समाज की ऐतिहासिक भूमिका और उनके सामाजिक-सांस्कृतिक योगदान की सराहना करते हुए कहा कि यह परंपरा रामकालीन गौरवशाली परंपरा की पुनर्स्थापना है।
संत समाज की उपस्थिति और आध्यात्मिक गरिमा
Prayagraj माघ मेला में जगद्गुरु श्री संतोष दास जी ‘सतुआ बाबा’, परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती जी सहित अनेक पूज्य संतों की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की आध्यात्मिक महत्ता बढ़ा दी। मुख्यमंत्री ने संतों की सभा में हिस्सा लिया और आयोजनों की व्यवस्था पर मीडिया से संवाद किया।
माघ मेला: संस्कृति, परंपरा और राष्ट्रीय चेतना
Prayagraj मुख्यमंत्री ने संगम में पवित्र स्नान कर बड़े हनुमान जी के मंदिर में पूजा-अर्चना की। उन्होंने माघ मेला को भारत की आस्था, संस्कृति और सामाजिक समरसता का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह आयोजन भविष्य की दिशा तय करने में भी मदद करता है। उन्होंने संदेश दिया कि सनातन संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करना आधुनिक समय में राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करता है।
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