BY: Yoganand Shrivastva
भारत और पाकिस्तान के बीच हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। हाल ही में भारत द्वारा किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पाकिस्तान ने कई ड्रोन हमलों की कोशिश की, जिन्हें भारतीय सुरक्षा बलों ने नाकाम कर दिया। इसी तनाव के बीच पाकिस्तान की ओर से परमाणु हमले की धमकी भी दी गई, जिससे चिंता और बढ़ गई है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि परमाणु हमला होता है, तो उसके बाद अचानक बारिश क्यों होने लगती है? और वह बारिश इतनी खतरनाक क्यों होती है?
परमाणु बम की तबाही सिर्फ विस्फोट तक सीमित नहीं होती
परमाणु हथियारों की विनाशकारी क्षमता सिर्फ विस्फोट तक सीमित नहीं रहती। यह विस्फोट के बाद उत्पन्न विकिरण (Radiation) के कारण भी लंबे समय तक जानलेवा असर छोड़ता है।
हिरोशिमा-नागासाकी: अतीत की चेतावनी
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जब अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए थे, तो हजारों लोग तुरंत मारे गए थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, लगभग 80,000 से अधिक लोगों की मौत सिर्फ एक बम गिरने के बाद हुई थी। लेकिन कई लोगों की जान बाद में रेडिएशन और ‘काली बारिश’ के कारण गई।

परमाणु हमले के बाद क्यों होती है बारिश?
जब परमाणु बम विस्फोट करता है, तो वह चारों ओर भारी मात्रा में गर्मी और ऊर्जा फैलाता है। इससे धूल, राख, मिट्टी और रेडियोधर्मी तत्व ऊपर की ओर उठकर वातावरण में मिल जाते हैं। जब ये कण बादलों में मिलते हैं, तो बारिश के रूप में वापस धरती पर गिरते हैं।
इस ‘काली बारिश’ में क्या होता है?
इस तरह की बारिश को रेडियोधर्मी बारिश या ब्लैक रेन कहा जाता है। इसमें मौजूद कण बेहद जहरीले होते हैं – जैसे प्लूटोनियम, यूरेनियम, सीज़ियम और स्ट्रोंशियम – जो मानव शरीर में घातक बीमारियां पैदा कर सकते हैं, जैसे कैंसर, त्वचा जलन, बाल झड़ना और अंगों की खराबी।
धरती पर गिरती हैं ज़हर भरी बूंदें
इस जहरीली बारिश की बूंदें काली दिखाई देती हैं क्योंकि वे धूल और रेडियोधर्मी तत्वों से भरी होती हैं। यह बारिश त्वचा पर जलन, आंखों में दर्द, और सांस लेने में तकलीफ पैदा कर सकती है।
इसका असर सालों तक रहता है
ब्लैक रेन का असर तुरंत नहीं, बल्कि लंबे समय तक चलता है। इसकी चपेट में आने वाले लोग आने वाले कई वर्षों तक बीमार रहते हैं, और कुछ की मौत भी हो जाती है।





