
प्रमोद श्रीवास्तव, विशेष संवाददाता
West Bengal : पश्चिम बंगाल… जहां सियासत हमेशा हाई-वोल्टेज रहती है… आरोप प्रत्यारोप ऐसे जिससे सियासी तापमान चरम पर होता है..दिल्ली बनाम बंगाल का नैरेटिव और बीजेपी टीएमसी का शक्तिप्रदर्शन…जाहिर है पश्चिम बंगाल का विधानसभा चुनाव, इस बार न केवल भाजपा और टीएमसी में आर पार की लड़ाई है, बल्कि एक दूसरे के लिये वर्चस्व की जंग है।बंगाल चुनाव में BJP और TMC के बीच इस बार भी सीधी टक्कर है।बीजेपी की ओर से अमित शाह बंगाल में डेरा डाले हुए हैं तो वहीं हर बार की तरह टीएमसी ओर से मोर्चे पर ममता।
नामांकन दाखिल करने का दौर चल रहा है, रोड शो, रैलियां और जनसभाओं में हुंकार है, और ललकार भी। लेकिन जिस सबसे बड़े मुद्दे पर बंगाल में बवाल मचा हुआ है वो है SIR… मालदा में 7 इलेक्शन ऑब्जर्वर को बंधक बनाए जाने की घटना ने SIR पर विवाद और गहरा दिया है।
West Bengal :BJP-TMC में आर-पार की लड़ाई, SIR पर सियासत गरमाई
आरोप-प्रत्यारोप के बीच हालात ऐसे बने कि चुनावी प्रक्रिया पर ही सवाल उठने लगे। मालदा से लेकर अन्य जिलों तक, SIR को लेकर टकराव अब खुलकर सामने आ चुका है। ऐसे में SIR विवाद अब सिर्फ एक प्रशासनिक मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह चुनावी नैरेटिव का अहम हिस्सा बन चुका है। बीजेपी इसे कानून-व्यवस्था और निष्पक्ष चुनाव का मुद्दा बना रही है, जबकि टीएमसी इसे राजनीतिक स्टंट करार दे रही है।
अब सवाल यही है क्या SIR का यह बवाल, चुनावी नतीजों को प्रभावित करेगा ? या फिर यह सिर्फ सियासी शोर बनकर रह जाएगा ? फिलहाल, बंगाल की चुनावी राजनीति में SIR एक नया ‘हॉट टॉपिक’ बन चुका है। जिस पर चुनावी घमासान अब और तेज होता दिख रहा है।। बंगाल की चुनावी सियासत के इसी ‘हॉट टॉपिक’ पर करेंगे चर्चा।

West Bengal : प. बंगाल विधानसभा चुनाव, किसका कितना प्रभाव ?
पश्चिम बंगाल में 294 सीटों पर सत्ता की जंग… ममता बनाम बीजेपी का सीधा मुकाबला… पश्चिम बंगाल में इस बार दांव सिर्फ सत्ता का नहीं, बल्कि सियासी वर्चस्व का भी है। अब चुनावों में ज्यादा वक्त नहीं बचा है, ऐसे में नामांकन और रैलियों में बीजेपी और टीएमसी का शक्ति प्रदर्शन है। एक ओर ममता सत्ता बचाने की जंग लड़ रही है, तो दूसरी तरफ बीजेपी सत्ता परिवर्तन के लिये ताल ठोक रही है।
लेकिन इस बार चुनाव सिर्फ नारों और रैलियों का नहीं, बल्कि वोटर लिस्ट, पहचान और ध्रुवीकरण की लड़ाई बन गया है। बात चुनावी मुद्दों की करें तो बेरोजगारी और विकास, कानून व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा, NRC/CAA के साथ ही… पहचान की राजनीति, भ्रष्टाचार बनाम कल्याणकारी योजनाएं… बीजेपी और टीएमसी की रेलियों और सभाओं के केंद्र में हैं। SIR विवाद और नामांकन का बवाल के साथ चुनावी प्रक्रिया पर सवाल है।
West Bengal : नामांकन और रैलियां दौर, किसका चलेगा जौर ?
West Bengal : विकास बनाम पहचान की राजनीति, भाजपा और टीएमसी का मुख्य एजेंडा है तो वहीं ध्रुवीकरण की रणनीति से दोनों ही दल अपने-अपने वोट बैंक को साधने में जुटे हैं। इस बीच मालदा जिले में SIR से जुड़े 7 इलेक्शन ऑब्जर्वर को बंधक बनाए जाने का मुद्दा तूल पकड़े हुए हैं। दरअसल पश्चिम बंगाल में SIR का काम अभी भी जारी है। 28 फरवरी को फाइनल वोटर लिस्ट जारी हुई थी।
इसमें 7.04 करोड़ वोटर के नाम थे। लगभग 60 लाख नाम न्यायिक जांच के दायरे में रखे गए। इन्हें वोटर लिस्ट में रखने या हटाने पर फैसले के लिए 705 न्यायिक अधिकारियों को नियुक्त किया गया था।और चुनावी प्रक्रिया के तहत SIR टीम इलाके का निरीक्षण करने पहुंची थी। इसी दौरान स्थानीय लोगों के एक समूह ने ऑब्जर्वर्स को घेर लिया और कुछ समय के लिए बंधक बना लिया। यह घटना अचानक भड़के विरोध के बीच हुई। इस घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई। कहा- ये घटना सोची-समझी और भड़काऊ लगती है।

West Bengal : हमें पता है उपद्रवी कौन हैं, इनका मकसद न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिराना और चुनावी प्रक्रिया को बाधित करना है। तो वहीं मुद्दे पर सियासी आरोप प्रत्यारोप भी। मालदा की घटना पर भड़कीं ममता ने चुनाव आयोग और भाजपा पर निशाना साधा, कहा कि ‘मेरी सारी शक्तियां छीन लीं’ घटना की जिम्मेदारी का ठीकरा अमित शाह पर फोड़ा। कहा वे लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने में बार-बार विफल रहे। बंगाल इस साजिश को बर्दाश्त नहीं करेगा। तो वहीं बीजेपी ने कहा कि ममता सरकार में ‘जंगल राज’ की स्थिति है। ममता सरकार की जिम्मेदारी थी कि वह लोगों की सुरक्षा करे, लेकिन इसके बजाय वह रोहिंग्या के अधिकारों की रक्षा में लगी है।
West Bengal : तो वहीं इस विवादित घटना के बीच नामाकंन, रैलियों और सभाओं का दौर भी जारी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भवानीपुर में रोड शो किया। कहा कि मैं अगले 15 दिन बंगाल में रहूंगा। ममता को घर हराना है। TMC को जड़ से उखाड़ फेंकने जनता को बिना किसी डर के वोट देना चाहिए। शाह ने कहा कि कोई भी गुंडा बंगाल के मतदाताओं को नहीं रोक सकता। जिस पर टीएमसी ने जोरदार पलटवार किया।
पश्चिम बंगाल में BJP और TMC ने एक दूसरे के खिलाफ आरोपों की सूची… यानी ‘चार्जशीट’ जारी कर चुनावी लड़ाई को नैरेटिव की जंग में बदल दिया है। जिसमें TMC के 15 साल के शासनकाल को नाकाम और विफल बताया गया है। ममता सरकार पर आरोप है कि राज्य पर गिरोहों का कब्जा है। जिसका जवाब आरोपपत्र के जरिए TMC ने भी दिया। जिसमें TMC के आरोपपत्र में BJP के पतन की बात कही। TMC का तर्क है कि बंगाल में कल्याणकारी योजनाओं का विस्तार देश के बाकी राज्यों से ज्यादा है। ममता ने केंद्रीय एजेंसियों के राजनीतिकरण पर भी सवाल उठाए हैं।
कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि बंगाल में इस बार चुनाव सिर्फ सत्ता का नहीं, बल्कि सियासी अस्तित्व का है… TMC के लिए सत्ता बचाने की चुनौती, और BJP के लिए इतिहास रचने का मौका… अब फैसला जनता के हाथ में है। दीदी या बदलाव ? ऐसे में देखना होगा कि सियासी वर्चस्व की जंग में ‘दीदी’ का किला बचेगा या ‘परिवर्तन’ की आंधी चलेगी ?
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