Ambedkar Jayanti: नई दिल्ली में आंबेडकर जयंती के अवसर पर अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि नंद गिरी ने भारत रत्न डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने बाबा साहेब को सामाजिक न्याय के साथ-साथ जातीय सद्भाव और समरसता का प्रतीक बताया।
Ambedkar Jayanti: सामाजिक न्याय और समानता का संदेश
अपने संबोधन में स्वामी चक्रपाणि ने कहा कि डॉ. आंबेडकर ने अपने जीवनभर छुआछूत, भेदभाव और अन्याय के खिलाफ संघर्ष किया। उन्होंने समाज को शिक्षा, समानता और संवैधानिक अधिकारों की दिशा दिखाई। साथ ही महिलाओं के अधिकार और सम्मान के लिए उनके योगदान को भी याद किया गया।
Ambedkar Jayanti: 1952 चुनाव का ऐतिहासिक संदर्भ
स्वामी चक्रपाणि ने वर्ष 1952 के पहले लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए बताया कि उस समय बॉम्बे नॉर्थ सेंट्रल सीट से चुनाव लड़ रहे डॉ. आंबेडकर के सम्मान में हिंदू महासभा ने अपना प्रत्याशी नहीं उतारा था। उन्होंने इसे उस दौर की राष्ट्रवादी सोच और आपसी सम्मान का उदाहरण बताया।
Ambedkar Jayanti: जातीय विवादों पर जताई चिंता
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जाति के नाम पर बढ़ते विवाद और एक-दूसरे पर टिप्पणी करना दुर्भाग्यपूर्ण है। किसी को भी किसी की जाति के आधार पर अपमानित करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे बाबा साहेब के जीवन से प्रेरणा लेकर समरसता का मार्ग अपनाएं।
Ambedkar Jayanti: बाबा साहेब के नाम पर वैमनस्य फैलाने पर टिप्पणी
स्वामी चक्रपाणि ने यह भी कहा कि कुछ लोग आज बाबा साहेब के नाम का उपयोग समाज में विभाजन फैलाने के लिए कर रहे हैं, जो उनके मूल विचारों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि समाज को ऐसे प्रयासों से सतर्क रहने की जरूरत है।
Ambedkar Jayanti: “वसुधैव कुटुम्बकम्” का दिया संदेश
उन्होंने सनातन धर्म के मूल सिद्धांत “वसुधैव कुटुम्बकम्” का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें सभी वर्गों के लिए समान सम्मान और एकता का संदेश निहित है।
Ambedkar Jayanti: एकजुट भारत के निर्माण का आह्वान
अंत में उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे आंबेडकर जयंती के अवसर पर जातीय भेदभाव को समाप्त कर एक समरस, संगठित और सशक्त भारत के निर्माण का संकल्प लें।





