BY: Yoganand Shrivastva
Sunil Lodhi बुंदेलखंड के लोकगायक सुनील लोधी इन दिनों अपनी सुरीली आवाज को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म ‘हनुमान अंश’ में गाया गया उनका भजन ‘मोरे संकट के कटैया हनुमान’ लोगों की जुबान पर चढ़ गया है। कभी जीवनयापन के लिए ट्रेनों और गांवों में भजन गाने वाले सुनील आज देशभर में पहचान बना रहे हैं।
फिल्म की लोकप्रियता के साथ-साथ उनके भजन को भी जबरदस्त प्यार मिल रहा है और सोशल मीडिया पर यह तेजी से वायरल हो रहा है।
जन्म से दृष्टिबाधित, लेकिन हौसला बना ताकत
Sunil Lodhi सुनील लोधी जन्म से दृष्टिबाधित हैं। आर्थिक तंगी के कारण वे कभी स्कूल नहीं जा सके और न ही उन्हें संगीत की औपचारिक शिक्षा मिली। बावजूद इसके उन्होंने अपनी लगन और प्रतिभा के दम पर गायन की अलग पहचान बनाई।
बताया जाता है कि महज 10 वर्ष की उम्र में उन्होंने तंबूरा बजाना सीख लिया था। इसके बाद उन्होंने भजन गायन को ही अपना जीवन बना लिया। कठिन परिस्थितियों के बीच भी उन्होंने अपने हुनर को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया।
सोशल मीडिया ने बदली किस्मत
Sunil Lodhi वर्षों तक गांव-गांव और ट्रेनों में भजन गाने वाले सुनील की आवाज सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों तक पहुंची। उनकी गायकी से प्रभावित होकर फिल्म ‘हनुमान अंश’ के निर्माताओं ने उन्हें भजन गाने का अवसर दिया।
फिल्म में गाया गया उनका भजन अब करोड़ों लोगों तक पहुंच चुका है। यूट्यूब और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसे भारी संख्या में देखा और सुना जा रहा है। सुनील लोधी की सफलता इस बात का उदाहरण है कि प्रतिभा और मेहनत के सामने परिस्थितियां भी हार मान लेती हैं।
युवाओं के लिए प्रेरणा बने सुनील
Sunil Lodhi बिना किसी संगीत प्रशिक्षण, बड़े मंच या फिल्मी पृष्ठभूमि के सुनील लोधी ने अपनी मेहनत और विश्वास के बल पर पहचान बनाई है। उनका सफर उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करने का साहस रखते हैं।
आज सुनील लोधी की आवाज केवल एक भजन तक सीमित नहीं है, बल्कि संघर्ष, समर्पण और सफलता की कहानी बन चुकी है।
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